
दंपती में आए दिन झगड़े, दोनों के कामकाजी होने से एकल परिवारों में बच्चों की मानसिक सेहत बिगड़ रही है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (निम्हांस) बंगलुरू के विशेषज्ञों के अध्ययन में ऐसे 7 फीसदी बच्चों में अवसाद और तनाव-चिंता पाई गई। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में नेशनल साइकोलॉजिकल कारपोरेशन और हरप्रसाद व्यवहार अध्ययन केंद्र की ओर से सोमवार को हुई कार्यशाला में व्याख्यान दिए गए। निम्हांस के चाइल्ड एडोलेसेंट एंड साइकेट्री विशेषज्ञ प्रो. जॉन विजय सागर के. ने बताया कि 8 से 17 साल तक के बच्चों पर अध्ययन में पाया कि 4.1 फीसदी में अवसाद और 3 फीसदी में तनाव-चिंता मिली। केस हिस्ट्री जानने पर वजह इनके माता-पिता में आए दिन की कलह होना पया गया। बच्चों पर भी चीखना-चिल्लाना, दंपती के कामकाजी होने पर पर्याप्त समय नहीं दे पाना वजह मिली। कुछ बच्चों में कोरोना महामारी में अपनों को गंवाने से भी ये दिक्कत बनी। इसका असर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, सामान्य जीवन पर भी पड़ा।
