– 10 माह के अंदर बुंदेलखंड में डिप्थीरिया (गला घोंटू) की चपेट में आए 15 बच्चे, सात बच्चों ने तोड़ दम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। समुचित टीकाकरण नहीं होने से बुंदेलखंड में बच्चे डिप्थीरिया (गला घोंटू) की चपेट में आ रहे हैं। 10 माह में मेडिकल कॉलेज में डिप्थीरिया की चपेट में आने वाले 15 बच्चे भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से सात की मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है अभी भी बच्चे डिप्थीरिया की चपेट में आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया ने बताया डिप्थीरिया की शुरूआत गले में से होती है। शुरूआत में बच्चे के गले में दर्द, खिच-खिच, खाना निगलने में दिक्कत, सिर दर्द और बुखार आता है। डिप्थीरिया का संक्रमण तीन-चार दिन में तेजी से फैलता है। इससे गले के अंदर सूजन व आवाज में भारीपन हो जाता है। इससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होती है।
बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज में जनवरी से अभी तक 15 संक्रमित बच्चों का उपचार किया गया है, जिनमें चार झांसी के हैं। उपचार के लिए आए सात बच्चों की मौत हो चुकी है, जो पड़ोसी जिलों के बताए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गला घोटू बीमारी का बचाव केवल टीकाकरण है। यह उन बच्चों में तेजी से फैलती है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। इसकी चपेट में आने वाले बच्चों को एंटी डिप्थीरिया टॉक्सिन दी जाती है, जो सीएमओ एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। डॉक्टरों द्वारा डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन देकर बच्चे का इलाज किया जाता है। यह टीका बच्चों में जन्म के बाद छह सप्ताह, 10 सप्ताह, 14 सप्ताह, 16 महीने और पांच साल में अवश्य लगवाएं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्विलेंस मेडिकल ऑफिसर डॉ. जूही सूलिया ने बताया डिप्थीरिया की बड़ी ही गहन तरीके से निगरानी की जाती है। कोई भी संक्रमित बच्चा मिलने पर तत्काल उपचार दिया जाता है। पीड़ित परिवार को दवाई उपलब्ध कराई जाती है। जो बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं, उनका टीकाकरण अतिरिक्त सत्र लगाकर कराया जाता है। बुंदेलखंड के जनवरी से अभी तक 15 बच्चे गला घोंटू बीमारी के मिले हैं। बताया कि ऐसा नहीं है कि टीकाकरण के बाद बच्चे को डिप्थीरिया की बीमारी नहीं होगी। यह बीमारी हो सकती है मगर जानलेवा नहीं होती।
:::
वर्जन
जिस जगह डिप्थीरिया का बच्चा मिलता है, उस क्षेत्र के बच्चों का दोबारा से टीकाकरण कराया जाता है। ऐसे बच्चे खासतौर से घुमंतू परिवार के होते हैं, जिनका भी टीकाकरण कराया जाता है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले बच्चों की दवा भेजी जाती है। – डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ झांसी
