रायबरेली। हादसे में क्षतिग्रस्त वाहन का क्लेम देने में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने 18 साल तक आनाकानी की। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से क्लेम के भुगतान के आदेश के बाद भी बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया। क्लेम देने से बचने के लिए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील कर दी। राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया। शनिवार को आयोग के अध्यक्ष ने याची को 2.61 लाख रुपये के क्लेम का चेक सौंपा।
जगतपुर थाना क्षेत्र के सिद्धौर निवासी शिव मोहन ओझा का वाहन 29 अप्रैल 2006 को हादसे में क्षतिग्रस्त हो गया था। गाड़ी का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से था। हादसे के बाद लखनऊ में गाड़ी को दुरुस्त कराकर बीमा कंपनी से 1.29 लाख रुपये का क्लेम मांगा। आरोप है कि बीमा कंपनी के सर्वेयर ने 25 हजार रुपये सुविधा शुल्क न मिलने पर क्लेम का भुगतान करने से इन्कार कर दिया था।
सर्वेयर की रिपोर्ट पर क्लेम को निरस्त कर दिया गया। वाहन मालिक ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया, जिस में आयोग ने 27 अगस्त 2014 को 1,14,846 रुपये का भुगतान 18 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। बीमा कंपनी ने क्लेम का भुगतान न देकर राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील कर दी।
राज्य आयोग ने जिला आयोग को आदेश को सही ठहराते हुए कंपनी की अपील को खारिज करते हुए ब्याज सहित पूरा भुगतान देने का आदेश दिया, जिसके बाद शनिवार को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मदनलाल निगम ने याची को क्लेम के 2,61,904 रुपये का चेक दिया। इस मौके पर आयोग की सदस्य सुनीता मिश्रा, प्रतिमा सिंह, अधिवक्ता केपी वर्मा, अजय श्रीवास्तव मौजूद रहे।
आयोग ने 14 मामलों में कराया 7.97 लाख का भुगतान
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में 14 मामलों में सेटलमेंट कराया। आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम ने बताया कि 25 मामलों को अदालत में रखा गया, जिसमें 14 मामलों को निस्तारित कराया गया, जिसमें याचीगणों को 7,97,273 रुपये का भुगतान कराया गया।