सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित ने बताया कि उससे 15 हजार रुपये भी ले लिए गए, लेकिन पेंशन और एरियर का भुगतान नहीं हो पा रहा है।

रिश्वत
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हुजूर, मैं गरीब हूं। अनुसूचित जाति का हूं। समाज कल्याण विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मी था। 2022 में रिटायर हो गया। लेकिन न मुझे पूरी पेंशन मिल रही। न एरियर भुगतान हुआ। 15 हजार रुपये भी दे चुका हूं। मेरे पास इलाज तक के लिए पैसा नहीं है। ये गुहार मानिक चंद ने जिलाधिकारी से लगाई है। उन्होंने मामले की जांच व बकाया भुगतान के आदेश दिए हैं।
देवरी रोड निवासी मानिक चंद्र मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। जनसुनवाई कर रहे जिलाधिकारी को पीड़ा बताई। कहा, मेरी नियुक्ति वर्ष में लिपिकीय त्रुटि के कारण अतिरिक्त पेंशन व एरियर नहीं मिला। निदेशालय ने 1989 से नियुक्ति को प्रभावी मानते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी को वेतन निर्धारण व एरियर भुगतान के आदेश दिए। दो साल बाद भी मुझे न पूरी पेंशन मिल रही न एरियर का भुगतान हुआ।
उन्होंने आरोप लगाए कि एरियर भुगतान के बदले तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी सतीश कुमार ने 10 प्रतिशत राशि की मांग की। मैंने 15 हजार रुपये उनके कहने पर प्रधान लिपिक को दिए थे। इस संबंध में जिलाधिकारी ने मामले की जांच सीडीओ से कराने और बकाया भुगतान के निर्देश दिए हैं।
