इटावा। अमेरिका-इजराइल व ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कोयले की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। 10 दिन में कोयले के दाम 15 हजार से 20 हजार रुपये प्रति टन पर पहुंच गए हैं। इससे जिले के 135 ईंट भट्ठों पर ईंट निर्माण की लागत बढ़ गई और इसका असर ईंटों के दाम पर पड़ने लगा है, जो आम लोगों को प्रभावित कर रहा है। वहीं बढ़ी कीमतों के चक्कर में लोगों ने नवनिर्माण कार्य पर ब्रेक लगा दिया है।

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जिले में 135 भट्ठे संचालित हैं। इन पर ईंट पकाने के लिए फसल अवशेष व लकड़ी के साथ ही कोयला इस्तेमाल होता है। कोयला व्यापारियों के अनुसार, गुजरात के कई बिजली संयंत्र समुद्र तट के पास स्थित हैं, इसलिए समुद्री मार्ग से अमेरिकी व इंडोनेशिया से जहाजों में एक साथ अधिक मात्रा में कोयला आता है। उत्तर प्रदेश, झारखंड या ओडिशा से रेल के माध्यम से कोयला मंगवाने की तुलना में गुजरात से कोयला मंगवाया जाता है, जो अच्छा होता है और दाम भी कम होते हैं। व्यापारियों के अनुसार इस कोयले की कीमत 10 दिन पहले 13 से 15 हजार रुपये प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 18 से 20 हजार रुपये प्रति टन हो गई है। भट्ठा मालिकों के अनुसार एक भट्ठे पर मार्च से जुलाई तक के सीजन में लगभग 400 टन तक कोयले की खपत होती है। भट्ठे अभी एक मार्च से शुरू हुए हैं और यह कीमत इतनी रही तो एक भट्ठे पर 24 लाख रुपये तक अधिक खर्च हो सकते हैं। इसका सीधा असर ईंटों के दाम पर पड़ेगा। ईंट के दाम अभी सात से आठ हजार रुपये प्रति एक हजार हैं। इनमें एक हजार रुपये तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।



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