होली का पर्व नजदीक आते ही हाथरस के पारंपरिक रंग-गुलाल की खुशबू देश के कोने-कोने तक पहुंचने लगी है। विदेशी बाजारों में भी आपूर्ति की जा रही है। इस साल हाथरस के रंग-गुलाल की मांग में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि हुई है, जिसका बड़ा कारण हर्बल उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता है।
हाथरस जिले में छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 50 उत्पादन इकाइयां हैं। स्थिति यह है कि कुछ समय पहले तक सालाना 120 करोड़ रुपये का यह कारोबार इस बार 260 करोड़ के आंकड़े तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 80 करोड़ रुपये का निर्यात और 180 करोड़ रुपये की घरेलू खपत का अनुमान है। मांग पूरी करने के लिए करीब 800 कर्मचारी रात-दिन गुलाल बनाने में जुटे हैं।
दरअसल, हाथरस के रंग-गुलाल को उसकी चमक, शुद्धता और सुरक्षित निर्माण प्रक्रिया के लिए पहचाना जाता है। मलयेशिया, सिंगापुर, दुबई, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल समेत कई देशों में आपूर्ति हो रही है। कारोबारी बताते हैं कि विदेशी बाजारों के साथ ही स्वदेशी मांग में भी औसतन 20 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है।
