Crisis in SP: After Swami Prasad Maurya, Kamalakant resigns from the post of State Secretary

सपा नेता कमलाकांत
– फोटो : सोशल मीडिया

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सपा के प्रदेश सचिव व पूर्व कैबिनेट मंत्री कमलाकांत गौतम ने सपा के प्रदेश सचिव के पद से अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेज दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भेदभाव पार्टी के भीतर भेदभाव हो रहा है, इससे बहुजन समाज काफी आहत है।

कमलाकांत गौतम ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2019 में चुनाव आयोग में पंजीकृत अपनी पार्टी का सपा में विलय किया। इसके बावजूद उन्हें आज तक कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। बिना किसी जिम्मेदारी के पार्टी का जनाधार नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसलिए अब इस महत्वहीन पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। बिना पद के पार्टी के लिए काम करते रहने की बात भी उन्होंने कही है। कमलाकांत गौतम ने अमर उजाला को बताया कि अपने समर्थकों के साथ बैठक करके आगे की रणनीति तय कर करेंगे। जो राजनीति में उनके कनिष्ठ रहे हैं, उन्हें राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है।

भ्रष्टाचार का पर्याय बनी भाजपा : अखिलेश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई है। उसने इलेक्टोरल बॉन्ड में जिस तरह से घालमेल किया है, उससे साबित होता है कि भाजपाई राजनीति की जड़ें भ्रष्टाचार के पाताल में अटी पड़ी हैं। अखिलेश ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित करने से किसान आंदोलन के अंदर एक नई ऊर्जा आई है। तथाकथित राजनीतिक चंदे के नाम पर पूंजीपति भाजपा की हथेली गरम करके खेती-किसानी से जुड़े कारोबारों पर कब्जा करके स्वार्थ साधना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि अब ये बात हर गांव, गली व मोहल्ले तक पहुंचनी चाहिए कि भ्रष्ट भाजपा कैसे अमीरों से पैसे लेकर आम जनता के खिलाफ साजिश रचती है। पैसे लेकर सवाल पूछने के मिथ्या आरोपों पर जब किसी सांसद की सदस्यता जा सकती है तो पैसे लेकर किसान-मजदूर विरोधी नीतियां बनाने पर भाजपा के सभी सांसदों की सदस्यता चली जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारी किसान की मृत्यु पर जताया शोक

अखिलेश ने शंभू बार्डर पर प्रदर्शनकारी गुरदासपुर के किसान सरदार ज्ञान सिंह की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भाजपा से इलेक्टोरल बॉन्ड के साथ-साथ किसान आंदोलनों में हुई किसानों की मौत का भी हिसाब मांगे।



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