
पिसावा में गूल की पटरी व रास्ते को दुरुस्त करने की मांग करते किसान
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पिसावा के गांव विक्रमगंज से गुजर रहे बड़ौदा माइनर की गूल का पानी पटरियों से बहने लगा है, जिसके चलते कई बीघा फसल जलमग्न हो गई है। किसान ओमवीर सिंह खेतों में पानी भरा देख कर आत्महत्या करने पर उतारू होने लगे तो मौके पर मौजूद किसानों ने समझा बुझाकर उन्हें घर भेजा।
गुस्साए किसानों का कहना है कि शीघ्र ही पटरी सही नहीं होती है तो वह आंदोलन करेंगे। नुकसान के मुआवजे की मांग भी की गई है। इससे गांव सुजाबलगढ़ के ग्रामीणों के समक्ष आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। सभी की मांग है कि पटरी के साथ रास्ते को भी दुरुस्त कराया जाए।
क्षेत्र के कुंवरपाल सिंह, ओमवीर सिंह, योगेश कुमार, सतीश कुमार, बब्बल सिंह, छोटू सिंह, छत्तर सिंह, केपी सिंह, वीरेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह आदि किसान जब 22 दिसंबर सुबह खेतों की तरफ गए तो फसल जलमग्न मिलीं। गूल की पटरी से बहता हुआ पानी खेतों की तरफ जा रहा था। किसानों का कहना है कि दस दिन पहले तनाव के चलते पानी पटरियों से होता हुआ खेतों में भर गया था।
वह पानी सूखा भी नहीं था कि पुनः रात को खेत जलमग्न हो गए हैं। कुंवरपाल सिंह ने दो बार खेत को जोत कर बुवाई कर दी है, लेकिन अब उन्हें उम्मीद नहीं है कि तीसरी बार बुवाई नहीं हो सकेगी, क्योंकि समय गुजर गया है। सिंचाई विभाग द्वारा गूल की आधी अधूरी सफाई कराई गई है। आगे से गूल बंद होने के चलते पानी का तनाव बढ़ जाने से आए दिन पटरी से पानी उतरकर खेतों में पहुंच रहा है। किसानों ने सिंचाई विभाग के जेई से भी मामले की शिकायत कर दी गई है।
