
Cyber Crime
– फोटो : Amar Ujala
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वाराणसी जिले के हुकुलगंज क्षेत्र की वृद्धा को डिजिटल अरेस्ट कर 32 लाख 40 हजार रुपये हड़पने के मामले में सात दिन की देरी से की गई शिकायत साइबर क्राइम थाने की पुलिस की जांच में बाधक बन रही है। फर्जी नाम-पते पर लिए गए जिन मोबाइल नंबर से वृद्धा के पास कॉल आई थी, वह सब अब इस्तेमाल में नहीं है। इसी तरह से फर्जी नाम-पते पर खोले गए जिन खातों में पैसे का लेनदेन किया गया था, वह भी खाली हो गए हैं।
ऐसे में साइबर फ्रॉड की इस घटना के 12वें दिन भी पुलिस के हाथ पूरी तरह से खाली रहे। पुलिस सर्विलांस और डिजिटल फुट प्रिंट की मदद से साइबर जालसाजों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। हुकुलगंज क्षेत्र की 67 वर्षीय नीना कौरा के व्हाट्स एप नंबर पर गत 15 अक्तूबर को जालसाज ने वीडियो कॉल कर खुद को मुंबई के अंधेरी थाने का थानाध्यक्ष बताया।
उसने कहा कि आप द्वारा सिंगापुर भेजे गए कूरियर में फर्जी पासपोर्ट और 140 ग्राम एमडीएमए है। इसलिए मुकदमा दर्ज आपको गिरफ्तार करने का आदेश हुआ है। फिर उसने फर्जी सीबीआई अधिकारी को कॉल ट्रांसफर कर बात करने को कहा। उसने भी वीडियो कॉल पर वृद्धा को उन्हें और उनके परिवार को लेकर इतना धमकाया कि वह डर गईं। फिर, उसने कहा कि आप अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा दीजिए। इसके लिए भेजे जा रहे अकाउंट नंबर में तत्काल अपने बैंक खाते का सारा पैसा ट्रांसफर कर दीजिए। 24 घंटे में सारा पैसा वापस हो जाएगा। इस पर नीना कौरा बैंक जाकर 32.40 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को आपबीती सुनाई और 21 अक्तूबर को साइबर क्राइम पुलिस थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया।
