
सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : istock
विस्तार
तीसरे आम चुनाव में पहली बार प्रदेश में रिपब्लिक पार्टी ने जाटव और मुस्लिम एकता का नारा दिया था। यह नारा था- ‘जाटव मुस्लिम भाई-भाई, हिंदू कौम कहां से आई’। अमर उजाला में 13 मार्च 1962 को प्रकाशित खबर के अनुसार, रिपब्लिक पार्टी का यह प्रयोग धर्म निरपेक्ष पार्टियों के लिए सिरदर्द बन गया था।
रिपब्लिक पार्टी का प्रतिक्रियावादी मुस्लिम से गठजोड़ नई बात थी। इस चुनाव में प्रदेश में 196 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े हुए। इसके अलावा 250 दलित प्रत्याशी चुनाव में थे। ऐसे में कांग्रेस को मिलने वाले दलित और मुस्लिम वोट कट गए। इसका लाभ तब की जनसंघ पार्टी को मिला। रिपब्लिक पार्टी के इस कदम से जनसंघ की ताकत तीन गुना बढ़ गई।
