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पार्किंसंस रोग का इलाज करने वाली डाॅक्टरों की टीम। – फोटो : अमर उजाला
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आईएमएस बीएचयू में शनिवार को पहली बार न्यूरोलॉजिकल बीमारी पार्किंसंस रोग से ग्रसित एक मरीज की सर्जरी कर डॉक्टरों की टीम ने उसे नया जीवन दिया है। न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर दीपिका जोशी के निर्देशन वाली टीम ने पहली डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी की।
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करीब आठ घंटे तक चली इस सर्जरी में न्यूरोसर्जरी के साथ ही एनीस्थीसिया विभाग की टीम ने भी सहयोग किया। खास बात यह है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीज की सर्जरी की गई। अब तक यहां सर्जरी न होने से मरीजों को दिल्ली भेजना पड़ता है। निजी अस्पतालों में इस पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होते हैं।
जौनपुर निवासी करीब 45 साल के एक मरीज लंबे समय से पार्किंसंस बीमारी से ग्रसित था। न्यूरोलॉजी विभाग में प्रो. दीपिका जोशी के निर्देशन में उसका उपचार चल रहा था। प्रो. जोशी के अनुसार, पार्किंसंस डिजीज एक आजीवन होने वाली बीमारी है। आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद होने वाली इस बीमारी की जद में अब 50 साल से नीचे वाले मरीज भी आ रहे हैं।
इस बीमारी के उपचार के दौरान जब दवाओं का असर कम होता है। या उसका प्रभाव नहीं होता है। तब मरीज की डीबीएस यानी डी ब्रेन स्टूमलेशन सर्जरी किया जाता है।