संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। खरीफ की फसल के लिए किसान तैयारी शुरू कर दें। पैदावार में वृद्धि के लिए गहरी जुताई आवश्यक है। इससे लगभग 15-20 फीसदी उत्पादन बढ़ जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश तिवारी ने बताया कि गहरी जुताई से फसलों को जड़ें बनाने और उन्हें पोषक तत्व पहुंचाने में मदद मिलती है। गर्मियों में गहरी जुताई करने से कीट प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन और मृदा जनित रोगों का प्रबंधन होता है।

उन्होंने कहा, मिट्टी में लगातार एक जैसी फसलें लगाने से व रासायनिक खादों व दवाओं से मृदा सख्त व कठोर हो जाती है। मिट्टी में सीमेंटेड लेयर (कड़ी परत) बन जाती है और भूमि में पानी प्रवेश नहीं कर पाता है, जिससे लगातार जल स्तर में गिरावट देखी जा रही है। वहीं मिट्टी कठोर होने से मृदा की जल धारण क्षमता व उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग, कीट एवं बीमारियों व खरपतवारों की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है। फसलों के उत्पादन में भी गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में मई-जून में मिट्टी पलटने वाले हल प्लाऊ, टर्न रेस्ट प्लाऊ आदि कृषि यंत्रों से जुताई करें। कम-कम तीन वर्षों में एक बार खेतों की 20 सेंटीमीटर तक गहरी जुताई करें।



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