दिल्ली धमाके में मारे गए दो दोस्त लोकेश अग्रवाल व अशोक कुमार के शव मंगलवार सुबह घर पहुंचे, तो परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। धमाका इतना भीषण था कि दोनों के शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे और उनके चीथड़े उड़ गए थे। शवों की भयानक हालत देखकर परिजन व रिश्तेदार चीख पड़े। धमाके से दोनों के चेहरे झुलस चुके थे और उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था।

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हादसे में जान गंवाने वाले लोकेश अग्रवाल और अशोक
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कारोबारी लोकेश के समधी, राजेश अग्रवाल ने घटना की वीभत्सता बयां करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मोबाइल पर दिखाए गए मृतकों के फोटो से उनकी पहचान कर पाना असंभव था। इसके बाद जब मोर्चरी में रखे शवों को देखा, तो कपड़ों से उनकी पहचान हो सकी।

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गमगीन परिजन
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राजेश अग्रवाल ने बताया चेहरे का सिर्फ एक हिस्सा ही थोड़ा-बहुत बचा था, वरना पूरा शरीर देखने लायक नहीं बचा था। इसी तरह, मंगरौला निवासी अशोक के शव की हालत भी बहुत खराब थी। उनके भी चीथड़े उड़ गए थे। शवों की यह भयानक स्थिति देखकर हर कोई सहम गया। दोनों के घर जुड़ी भीड़ में सभी की आंखें नम थीं।

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दिल्ली ब्लास्ट में बेटे की माैत के बाद गमगीन परिजन
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दोनों दोस्त बाइक में थे सवार, एक धमाके ने छीन ली जान
दिल्ली कार धमाके में हसनपुर के खाद कारोबारी लोकेश अग्रवाल (52) व मंगरौला निवासी डीटीसी कंडक्टर अशोक कुमार (34) की जान चली गई। दोनों दोस्त थे। अशोक दिल्ली में रहते थे। वहीं, दिल्ली के अस्पताल में भर्ती समधन (बेटे की सास) को देखने पहुंचे कारोबारी ने अशोक को दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया था।

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अमरोहा में गमगीन परिजन
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इसके बाद दोनों बाइक से आनंद विहार मेट्रो स्टेशन जा रहे थे जहां से लोकेश को हसनपुर के लिए बस पकड़नी थी। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव घर पहुंचे तो मातम पसर गया। दोनों परिजन बदहवास हो गए। अंतिम दर्शन करने पहुंचे लोगों की आंखें नम हो गईं। दोपहर में दोनों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, दोनों दोस्तों की मौत से लोगों में गम और गुस्सा है।
