
अदालत का फैसला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद अदालत में जानलेवा हमले के आरोपी बंदी नौशाद के फरार होने के मामले में पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ आपराधिक केस व विभागीय कार्रवाई एक साथ चलाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने याची के खिलाफ जारी विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने शहनवाज की याचिका पर अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक को सुनकर दिया है।
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याची के वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने एमपाल एंथोनी मामले में कहा है कि तथ्य व सबूत आपराधिक व विभागीय कार्रवाई में एक व समान हों तो विभागीय कार्रवाई नहीं चलेगी। तथ्य व साक्ष्य एक व समान न होने पर आपराधिक व विभागीय कार्रवाई एक साथ चल सकती है। इस आधार पर याची ने विभागीय कार्रवाई को रोकने की मांग की है। क्योंकि एक ही तथ्य व सबूतों पर दोनों केसों में आरोप साबित किया जाएगा। याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और विभागीय कार्रवाई में अप्रैल 2024 में चार्जशीट दी गई है। दोनों मामले में याची पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है।
