आगरा। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के 9वें दिन शहर के दिगंबर जैन मंदिरों में श्रद्घालुओं ने उत्तम आकिंचन धर्म आस्था, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया। धर्म प्रचारकों ने कहा कि आकिंचनता केवल भौतिक वस्तुओं का परित्याग नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी उनसे दूर रहने का अभ्यास है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, वैराग्य और आंतरिक पवित्रता का संकल्प लिया।

श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर छीपीटोला के निर्मल सदन में दशलक्षण पर्व पर शुक्रवार को उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की गई। सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सांसारिक मोह माया से विरक्ति और त्याग के भाव को आत्मसात किया।

मुनिश्री सौम्य सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मा की शुद्धि के लिए दस उत्कृष्ट गुणों का अभ्यास कराता है। कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए बाह्य वस्तुओं से अनासक्ति अनिवार्य है। स्पष्ट किया कि उत्तम आकिंचन धर्म का अभिप्राय है कुछ भी मेरा नहीं। यह भावना जब जीवन में जागृत होती है, तभी व्यक्ति सच्चे अर्थों में आत्म-कल्याण की ओर अग्रसर होता है। शिक्षक दिवस पर असली शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो मुक्ति दिला दे वही असली शिक्षा है। इस मौके पर अध्यक्ष मनोज कुमार जैन, मुरारी लाल जैन, अक्षय जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, अनिल फौजी, प्रवेश जैन, दीपक जैन, संजीव जैन, राजीव जैन और मीडिया प्रभारी दिलीप जैन आदि मौजूद रहे।

आत्मा के अलावा जग में कुछ भी अपना नहीं

आगरा। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी में पंडित अंशुल जैन शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म का अर्थ स्पष्ट किया। बताया कि आत्मा के अपने गुणों के सिवाय संसार में अन्य कोई भी वस्तु अपनी नहीं है। शुभारंभ मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेश जैन, मंत्री विजय जैन, कोषाध्यक्ष मगन चंद, अनिल आदर्श जैन ने आचार्य विद्यासागर महाराज की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर महेश चंद जैन, सतेंद्र जैन, रवि जैन, दिनेश जैन, सुदीप जैन, दीपक जैन, शैलेंद्र जैन, अनिल जैन, संजीव जैन, मुकेश जैन आदि मौजूद रहे।



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