
मुड़िया पूर्णिमा
– फोटो : संवाद
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राजकीय मुड़िया मेले के समापन के बाद गिरिराज प्रभु से विदा लेते वक्त भक्तों की आंखें नम हो उठीं। अगले साल दोबारा आने का वादा कर श्रद्धालु घरों को लौट गए। मेले में पिछले छह दिन से भंडारा लगा रहे मध्यप्रदेश के डबरा से आए सोनू जैन, सोनू नगरिया, अविनाश खर्द, नीरज गुप्ता ने कहा कि गिरिराजजी के धाम जैसा कोई स्थल नहीं। यहां आकर मन में श्रद्धा का भाव उत्पन्न हो जाता है। परिक्रमा में छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है। सब समर्पण भाव से प्रभु की परिक्रमा लगाते हैं।
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दिल्ली की महिला श्रद्धालु पूजा वर्मा ने बताया कि पिछले 33 वर्ष से गिरिराजजी की परिक्रमा करने के लिए गुरु पूर्णिमा पर परिवार के साथ आतीं हैं। कुछ लोग यहां आने वाले भक्तों की सेवा करने के उद्देश्य गोवर्धन धाम आते हैं। सेवा भाव के बाद गिरिराजजी की तलहटी छोड़ने का मन ही नहीं करता है। लखनऊ से आए प्रदीप गुप्ता ने बताया कि मुड़िया पूर्णिमा मेले पर गिरिराज प्रभु स्वयं ही भक्तों को सेवा की प्रेरणा देते हैं।
