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पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
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रामभद्राचार्य महाराज
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समापन के मौके पर पं. धीरेंद्र कृष्ण ने कहा कि विभिन्न परिस्थितियों के चलते तमाम सीधे-साधे लोग उन तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में इस यात्रा में एक संकल्प लिया है कि वे बीच-बीच में गांव-गांव जाएंगे और वहां वे लोगों से दक्षिणा नहीं लेंगे, बल्कि यह वचन लेंगे कि उन्हें आखिरी सांस तक अपने धर्म में बने रहना है। इस दरम्यान उन्होंने हिंदू राष्ट्र का संकल्प भी दोहराया। साथ ही उन्होंने कहा कि जाति-पाति और छुआछूत का भेद मिटाने के उद्देश्य से यात्रा निकाली गई थी। यात्रा का यह क्रम आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

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आखिरी दिन जुटे लाखों श्रद्धालु
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आखिरी दिन यात्रा में लगभग पांच लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया जा रहा है। भारी संख्या में झांसी के लोग भी यात्रा का हिस्सा बने। इनमें से तमाम श्रद्धालु ऐसे भी रहे, जो 21 नवंबर से लगातार यात्रा का हिस्सा बने रहे। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक यात्रा में शामिल रहे। यात्रा में महिलाएं भी सभी के साथ उत्साह के साथ कदमताल करती नजर आईं। 158 किमी की यात्रा के दौरान कई जगह रात्रि विश्राम हुआ। यात्रा मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा के स्वागत का क्रम बना रहा। धर्माचार्यों के अलावा जनप्रतिनिधि और फिल्म अभिनेता भी यात्रा का हिस्सा बने रहे।

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तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज
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अब ओम क्रांति का भी लगना चाहिए नारा: रामभद्राचार्य
सनातन हिंदू एकता के समापन के मौके पर शुक्रवार को तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज भी ओरछा पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि जो हिमालय के समान स्थिर और चंद्रमा के समान शीतल है, वही हिंदू है। हिन्दू कभी हिंसक नहीं होता, लेकिन हिंसा का विनाश करने वाला अवश्य होता है। उन्होंने कहा कि अब ओम शांति के साथ ओम क्रांति का नारा भी लगना चाहिए। शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कह कि जो हमारी हिंसा करने आए, हमें उसकी हिंसा करनी चाहिए। इस दरम्यान उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी हिंदू मंदिर होंगे, उन्हें लेकर रहेंगे। इससे पूर्व उन्होंने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। वहीं, रामचंद्रदास महाराज ने कहा कि ओरछा दूसरी अयोध्या है, यहां से जाति-पाति के ढांचे को ढहाने का संकल्प लेना है।
