संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/ललितपुर। इस साल जुलाई से अब तक जनपद के छह गांवों में डायरिया से आठ लोगों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में चार गांव में हैंडपंप के दूषित पानी को ही जिम्मेदार ठहराया गया। जबकि दो गांवों की रिपोर्ट अभी आनी है। सरकारी मशीनरी की लापरवाही का आलम यह है कि दूषित पानी से मौतों की पुष्टि के बाद भी हैंडपंपों के पास सफाई नहीं की जा रही। जबकि एक के बाद एक गांव में डायरिया फैल रहा है।
ग्राम भैरा में दो परिवारों के लिए हैंडपंप लगा हुआ है। इसी हैंडपंप के पानी के प्रयोग से डायरिया फैलने की आशंका जताई जा रही है। डायरिया से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन की टीम पहुंची। जांच में हैंडपंप के पास गड्ढा मिला। इसमें गंदगी पाई गई। साथ ही पास में नाला निकला हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि नाले और गड्ढे का पानी हैंडपंप में रिसकर पहुंचा होगा। इससे दूषित हुए पानी से डायरिया फैल गया है।
जलंधर के ग्राम प्रधान की भी हो चुकी है मौत
जुलाई में ब्लॉक तालबेहट के ग्राम वर्मा बिहार में डायरिया फैलने से एक मासूम समेत महिला की मौत हो गई थी। 22 लोग बीमार हुए थे। ग्राम जलंधर में प्रधान की जान चली गई। साथ ही 19 लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे। ग्राम दौलतपुर में एक की मौत हो गई थी, वहीं 19 लोग डायरिया से बीमार हो गए थे। ग्राम सिंदवाहा में 12 लोग डायरिया बीमारी हो गई थी। बीते सप्ताह ग्राम भड़यावरा निवासी एक बालिका की मौत हो गई थी। ग्राम अमउखेड़ा में 31 व कुचदों में 17 डायरिया की चपेट में आ गए थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद ने बताया कि हैंडपंप के पानी का नमूना लेकर जांच को भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट होगी। हैंडपंप के पानी को उपयोग में लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
