{“_id”:”6781d574544e43ef1708370d”,”slug”:”difference-between-air-pollution-laboratory-and-uppcb-data-2025-01-11″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”UP: सांसों से खिलवाड़, एक्यूआई में जारी फरेब…वायु प्रदूषण प्रयोगशाला और यूपीपीसीबी के आंकड़ों में अंतर”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
आगरा का मौसम – फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर के लोगों की सांसों के साथ खिलवाड़ जारी है। हवा की गुणवत्ता बताने वाले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के जरिए फरेब चल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वायु प्रदूषण प्रयोगशाला के प्रदूषण आंकड़े एक जैसे हैं, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े इन दोनों से आधे से भी कम दर्शाए जा रहे हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार में मिली जानकारी से हुआ है। यूपीपीसीबी और एएसआई-सीपीसीबी के तीन माह के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया।
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प्रदूषण की जांच करने वाले ऑटोमेटिक स्टेशनों से छेड़छाड़ और पानी का छिड़काव कर धूल कणों की कमी दर्शाने का खुलासा होने के बाद भी एक्यूआई में फरेब जारी है। एएसआई की वायु प्रदूषण प्रयोगशाला ने अक्तूबर में ताजमहल के पश्चिमी गेट पर एसपीएम की मात्रा 197 पाई थी, लेकिन यूपीपीसीबी का एक्यूआई 98 ही दर्शाया गया। एएसआई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरह मैनुअल फिल्टर पेपर से जांच करता है, जबकि यूपीपीसीबी के ऑटोमेटिक स्टेशन लगे हैं, जिनका संचालन आउटसोर्सिंग के जरिए हो रहा है। दोनों के आंकड़ों में दोगुने का अंतर है। इसी तरह साल 2021 से साल 2024 तक हर साल प्रदूषण के आंकड़ों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है, जबकि यूपीपीसीबी के आंकड़ों में यह कमी 80 फीसदी की हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होता है प्रदूषण का ब्योरा
एमसी मेहता की याचिका में वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से हर साल आगरा में प्रदूषण का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लैब ताजमहल के पश्चिमी गेट स्थित टावर पर स्थापित की गई है जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रसायन शाखा ने पूर्वी गेट पर दशहरा घाट के किनारे बने ताज के बुर्ज पर वायु प्रदूषण एवं प्रस्तर संरक्षण प्रयोगशाला स्थापित की। सीपीसीबी की रिपोर्ट हर तिमाही सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा रही है।
एसपीएम अक्तूबर नवंबर दिसंबर
यूपीपीसीबी 98 157 176
सीपीसीबी 201 298 261
एएसआई 197 312 255
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों और तीन अन्य एजेंसियों सीपीसीबी, एएसआई और स्मार्ट सिटी के आंकड़ों में भारी अंतर है। कौन सही है, यह बताने की जिम्मेदारी टीटीजेड अथॉरिटी की है। वह जांच कराए कि चारों में से आंकड़े किसके ठीक हैं, किस पर भरोसा कर एहतियात बरती जाए।
केंद्र के आंकड़े एक जैसे, राज्य ने घुमाया
ताजमहल पर केंद्र सरकार के दोनों विभाग एएसआई और सीपीसीबी के एयर क्वालिटी के आंकड़े एक जैसे हैं। इनमें मामूली अंतर है, जबकि यूपीपीसीबी के आंकड़ों में 2022 के बाद भारी गिरावट दिखाई गई। इसी को आगरा मॉडल का नाम दिया गया है।