Drought is going on, farmers are disappointed

धूप निकलने के बाद पार्क में पहुंचे बच्चे व लोग। 

श्रावस्ती। पूस मास आज सोमवार को समाप्त हो रहा है लेकिन बारिश नहीं हुई। बादलों के बिन बरसे लौट जाने से किसान मायूस हैं। बादलों की लुकाछिपी व बर्फीली पछुआ हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ रहे ठंड से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई। लोग खुद से इंतजाम कर अलाव जलाते देखे जा रहे हैं।

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तराई में मौसम विभाग की चेतावनी भी गलत साबित हो रही है। विगत दो माह से जिले में बारिश न होने के कारण खेतों में लगी दलहनी व तिलहनी फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसका असर गेहूं के विकास पर भी दिख रहा है। जिले में ऐसी मान्यता है कि घूम के बरसे पूसा, तो आधा गेहूं आधा भूसा। अर्थात पूस मास में बारिश हो तो गेहूं की बेहतर पैदावार होती है। लेकिन अब जब आज पूस मास भी समाप्त हो रहा है और पानी नहीं बरसा तो किसानों को अपनी गेहूं के फसल के बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।

रात में कोहरा, दोपहर में बदली, फिर खिली धूप

जिले में रविवार को मौसम का अलग-अलग रंग देखने को मिले। शनिवार रात शुरू हुआ घना कोहरा भोर तक छाया रहा। इससे वाहनों की रफ्तार पर असर पड़ा। वहीं भोर में बदली छाने व बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। लोग दोपहर तक ठंड से बेहाल दिखे। इसका असर बाजारों में देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के कारण दोपहर तक मुख्य मार्ग व बाजार सूने नजर आए। वहीं दोपहर बाद खिली धूप देख लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि इस बीच धुंध छाई होने के कारण धूप का कोई खास असर नहीं दिखा।

हाट बाजारों में नहीं जले अलाव

जिले में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड के बावजूद नगर निकाय को छोड़कर किसी भी ग्राम पंचायत में अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई है। इतना ही नहीं ब्लाक मुख्यालय के गांव व बाजारों में भी अलाव की व्यवस्था दिखाई नहीं दी। ऐसे में ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग खुद से लकड़ी आदि का इंतजाम कर अलाव तापते नजर आए। ऐसा ही कुछ गिलौला कस्बे में देखने को मिला। जहां खुटेहना मोड़, तिलकपुर मोड़, सुविखा मोड़ व रोडवेज बस अड्डा सहित पूरे बाजार में कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई। कुछ लोग ठंड से बचने के लिए लकड़ी व कूड़ा करकट जला कर राहत तलाशते नजर आए।



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