Dry canals are increasing the pain of farmers

सूख रही धान की नर्सरी

अमेठी सिटी। गर्मी व तापमान वृद्धि के बीच किसानों को जहां प्री-मानसून ने धोखा दे रहा, तो वहीं सूखी पड़ी जिले से गुजरने वाली नहरें किसानों का दर्द बढ़ा रही हैं। बीती 18 जून तक नहरों में पानी की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई है।

धान की नर्सरी तैयार होने और रोपाई का समय होने से किसानों परेशान हैं। निजी व किराये के नलकूप की मदद से किसानों ने धान रोपाई भी शुरू कर दी है, लेकिन जो किसान पूरी तरह नहर पर आश्रित हैं वह पानी का इंतजार कर रहे हैं।

जिले में नहरों का जाल बिछा होने से एक बड़ा हिस्सा खेती के लिए नहरों के पानी पर आश्रित है। जिले की प्रमुख फसलों में शामिल धान की रोपाई 15 जून से किसान शुरू करते हैं। मई माह में कड़ी मशक्कत के साथ किसानों ने धान की नर्सरी तैयार की तो खेती-किसानी के समय प्री-मानूसन के साथ नहरों ने उन्हें धोखा दे दिया है। किसान कभी आसमान की ओर देख रहा है तो कभी नहरों में पानी की उम्मीद में विभाग के पास फोन कर जानकारी ले रहा है। हर तरफ उसे निराश ही होना पड़ा।

इन दिनों धान की नर्सरी तैयार करने खेतों में पानी की आवश्यकता है। वहीं, उड़द की फसल सूख रही है। नहर व माइनर पर निर्भर किसानों को सिंचाई के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि नहरें सूखी हैं, खेत प्यासे हैं और अन्नदाता परेशान हैं।

सूख रही 7,554 हेक्टयर में तैयार जायद फसल

जिले में 7554 हेक्टयर में किसानों की चरी, उड़द, मूंग और सब्जियों की फसल खड़ी है। जून की तपती दोपहरी में फसलों को सिंचाई के लिए पानी की सख्त जरूरत है। जिले से गुजरने वाली नहर व रजबहा इन दिनों सूखे पड़े हैं। बारिश का अभाव, बेतहाशा बिजली कटौती से निजी नलकूपों से सिंचाई की व्यवस्था भी काम नहीं कर रही है।

जायद सीजन फसलों की हुई है बोआई

फसल का नाम – बोआई का रकबा

मक्का – 340 हेक्टेयर

उड़द – 2344 हेक्टेयर

मूंग – 744 हेक्टेयर

सूरजमुखी – 95 हेक्टेयर

सब्जियां – 2976 हेक्टेयर

हरा चारा – 1025 हेक्टेयर

जिले में 1.21 लाख हेक्टेयर में होती है धान की खेती

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की प्रमुख फसलों में शामिल धान की खेती में जिले में 1,21,138 हेक्टेयर भूमि पर होती है। 15 जून से धान रोपाई का काम शुरू होता है, जोकि 15 जुलाई तक चलेगा। करीब एक माह पहले किसान धान की नर्सरी (बेहन) तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं। धान की नर्सरी 383.33 हेक्टयर में तैयार होती है। 15 जून से किसान धान की रोपाई करते हैं, लेकिन नहरों में पानी नहीं होने से किसानों के सामने निजी नलकूपों की मदद से नर्सरी तैयार करने को मजबूर हैं।

पिछड़ रही धान रोपाई

नहर व माइनरों के भरोसे खेती करने वाले किसानों के समक्ष बड़ा संकट है। उड़द व मेंथा की सिंचाई करने के लिए किसान परेशान हैं। धान की रोपाई में देरी हो रही है। गौरीपुर निवासी किसान सरजू तिवारी ने बताया कि 15 जून से 15 जुलाई तक धान की रोपाई होती है। मई माह में धान की बेहन डाल तैयार की थी समय से रोपाई हो जाएगी। मानसून के साथ नहर भी धोखा दे रही है, ऐसे में रोपाई में देरी हो रहा है। किसान बसंत कुमार ने कहा कि धान की बेहन एक माह से अधिक की हो रही है।

नहर सूखी होने से रोपाई नहीं हो पा रही है। लगता है दोहरी मार उठानी पड़ेगी। राजगढ़ निवासी किसान गंगादीन ने कहा कि रोपाई के समय के नहरों में धूल उड़ना चिंता का विषय है।

23 जून तक पानी पहुंच जाएगी पानी

अनुरक्षण कार्य के लिए वार्षिक बंदी के तहत मुख्य एवं पोषक नहर हेड से बंद थी। नहरों में पानी छोड़ने काम शुरू हो गया है। मुख्य एवं पोषक नहर हेड से पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है। 23 जून तक जिले से गुजरने वाली नहरों व माइनरों में पानी की आपूर्ति होगी। जिसके बाद रोस्टर के अनुसार सभी नहरों व माइनरों में टेल तक पानी पहुंचाया जाएगा।

रमाशंकर राय, एक्सईएन



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