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Earthquake
– फोटो : iStock



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उत्तर प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। गोरखपुर में शुक्रवार रात तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस दौरान घरों में मौजूद लोग बाहर निकल आए। 

जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने बताया कि इससे जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

भूकंप के तेज झटके से रात को घरों से बाहर निकले लोग, दहशत

महराजगंज में शुक्रवार करीब 11 बजे के बाद अचानक भूकंप के तेज झटके से लोग सहम गए। जिले भर में शहर से लेकर गांव तक लोग घरों से बाहर निकल गए। घरों में अचानक रखी हुई चीज हिलने लगीl 

भूकंप का केंद्र नेपाल में चीन बॉर्डर की तरफ बताया गयाl रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 रही।

शहर के आत्माराम गुप्ता ने बताया कि अचानक पंखा हिलने लगा यह देखकर तेजी से घर से बाहर निकाला, इतने में आसपास के लोग भी बाहर निकल गए। जिला अस्पताल में भी भर्ती मरीज भी परेशान हो गए। तीमारदारों के साथ कुछ मरीज भी बाहर निकल गए। शहर के सभी मोहल्ले में लोग घर से बाहर खाली मैदान में एकत्र रहे। दहशत के कारण रात भर लोगों को नींद नहीं आई।

क्यों आता है भूकंप?

पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

 

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

 



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