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नोएडा में लग्जरी फ्लैट बनाने वाली कंपनी की निवेशकों से धोखाधड़ी की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चार शहरों दिल्ली, मेरठ, चंडीगढ़ और गोवा में 11 से अधिक ठिकानों पर छापा मारा। छापे में कंपनी के कई अन्य प्रोजेक्ट में नियम विरुद्ध निवेश के प्रमाण मिले हैं। ईडी ने सभी ठिकानों से संदिग्ध दस्तावेज, बैंक खातों से जुड़ी जानकारी, कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, मोबाइल आदि कब्जे में लिए हैं। छापे की कार्रवाई देर रात तक जारी रही।

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बीते दिनों हाईकोर्ट ने ईडी को नोएडा में हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लोटस-300 प्रोजेक्ट के निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की जांच करने का आदेश दिया था। कंपनी के निदेशकों पर आरोप था कि उन्होंने प्रोजेक्ट के नाम पर निवेशकों से रकम जुटाई जिसे बाद में दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट कर दिया। निवेशकों को जिस क्षेत्रफल का फ्लैट देने का कंपनी ने वादा किया था, उसे भी पूरा नहीं किया। हाईकोर्ट के आदेश पर बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। हालांकि अदालत ने अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई जारी रखने को कहा था। इसके बाद राजधानी स्थित ईडी के जोनल कार्यालय की टीमों ने मंगलवार को कंपनी के निदेशकों के ठिकानों को खंगाला है। मेरठ में कालीन कारोबारी के कई ठिकाने छापे की जद में आए हैं, जहां छानबीन की गई।

636 करोड़ रुपये जुटाए थे

अधिकारियों के मुताबिक कंपनी ने लोटस-300 प्रोजेक्ट में 330 फ्लैट बनाने के लिए निवेशकों से 636 करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि कंपनी लोगों को फ्लैट देने के बजाय प्रोजेक्ट की सात एकड़ भूमि दूसरे बिल्डर को बेच दी। इसके बाद निवेशकों ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में कंपनी और निदेशकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे। इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।



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