
केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह।
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विस्तार
यूपी के बाद अन्य राज्यों में पार्टी विस्तार की कवायद में जुटे राष्ट्रीय लोकदल को पहले ही प्रयास में कड़ा झटका लगा है। पार्टी जम्मू में दस सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ी थी, लेकिन एक भी सीट पर उसका खाता नहीं खुला है। ऐसे में आगे महाराष्ट्र, झारखंड व दिल्ली में होने वाले चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही पार्टी को खुद को साबित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
भाजपा गठबंधन में शामिल रालोद ने जम्मू-कश्मीर के चुनाव में गठबंधन से इतर अकेले चुनाव में उतरने का निर्णय लिया था। हालांकि पार्टी ने सिर्फ घाटी में ही अपने प्रत्याशी उतारे। पार्टी ने दस सीटों पट्टन, लैंगेट, शिलांग टांग, सेंट्रल शिलांग, सोनावारी, बांदीपोरा, बारामुला, वीरवाह, जदीबल, रफियाबाद सीट पर प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने वहां प्रचार भी किया, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। पार्टी के जम्मू प्रभारी विनय प्रधान ने कहा कि हम यहां पर दिसंबर-जनवरी में होने वाले निकाय चुनाव में भी उतरेंगे। विधानसभा चुनाव से जम्मू में पार्टी का कार्यकर्ता बेस तैयार हुआ है। पहला चुनाव होने से हमें यहां पर अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिली। पर, आगे हम सफल होंगे।
दो धड़ों में बंट गया मतदाता
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन त्रिलोक त्यागी ने कहा कि जम्मू में पूरा मतदाता दो धड़ों में बंट गया। जम्मू में जहां भाजपा को सीटें मिली वहीं घाटी में नेशनल कांफ्रेंस व कांग्रेस गठबंधन को। ठीक से देखें तो कांग्रेस भी यहां पर ज्यादा सफल नहीं रही। यही वजह है कि हमारे पक्ष में परिणाम नहीं रहा है। पार्टी जम्मू में निकाय चुनाव और झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली व उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी।
सपा-कांग्रेस की चाल को समझ गई जनता
प्रदेश में सपा द्वारा विधानसभा उपचुनाव के लिए छह सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए जाने पर रालोद के प्रदेश प्रवक्ता अंकुर सक्सेना ने कहा कि पंजे और साइकिल का मिलन एनडीए को अस्थिर करने के उद्देश्य हुआ था। किंतु अपने प्रयास में सफ़लता न मिलती देख सपा-कांग्रेस की राहें फिर जुदा होती दिख रही हैं। अंकुर ने बयान जारी कर कहा कि बिना किसी नीति-रीति के केवल सत्ता हासिल करने के लिए चुनावी बेला में बनाए गए मौकापरस्त गठबंधन को आम जनमानस समझ चुका है। वह दोबारा इनके झांसे में आने वाली नहीं है।
