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हथिनी बानी – फोटो : वाइल्ड लाइफ एसओएस
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उत्तराखंड में ट्रेन ने हथिनी और उसकी 9 महीने की बच्ची को टक्कर मार दी थी। हथिनी मर गई और उसकी बच्ची गंभीर घायल हालत में बगल के खेत में जा गिरी थी। उसे पीठ में लकवा हो गया था। मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में इलाज हुआ। अब वह उठने लगी है। खेलती भी है। एक साल में बानी को नई जिंदगी मिल गई है। इससे देखभाल करने वाली टीम भी काफी उत्साहित हैं।
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वाइल्ड लाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. इलियाराजा के मुताबिक, घायल हथिनी का नाम बानी रखा गया है। उसने बुधवार को एक साल पूरा कर लिया। फरवरी 2024 में वह घायल हुई थी। वह स्पास्टिक पैरापैरेसिस से पीड़ित थी। संस्था की टीम ने बानी के इलाज में आयुर्वेद, हाइड्रोथेरेपी और एक्यूपंक्चर सहित कई उपचार विधियों का प्रयोग किया।
उसकी हफ्तों तक तेल मालिश और हाइड्रोथेरेपी की गई। उसी का नतीजा है कि वह अब उठने में सक्षम हो गई है। कम दूरी तक चलने और अपने आस-पास की हरियाली को जानने-समझने लगी है। उप निदेशक ने बताया कि बानी के लिए कई रचनात्मक एनरिचमेंट तैयार किए हैं। जिससे उसकी मांसपेशियां लगातार सक्रिय रहें। उसे चलने-फिरने में कोई रुकावट न हो।