सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में 14 महीने से नियमित कुलसचिव की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इस वजह से प्रशासनिक कार्यों के अलावा ठेका, भर्ती एवं दवाइयों की खरीद फरोख्त में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि प्रभार विश्वविद्यालय के एक चिकित्सक देख रहे हैं।
यह आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का इतिहास है कि नियमित कुल सचिव नियुक्ति हो जाने के बाद सेवानिवृत्त या फिर स्थानांतरण हो जाने के बाद लंबे समय तक नियमित कुलसचिव का पद चिकित्सकों के हवाले रहता आ रहा है। इस वजह से उनके विभाग के भी काम में अवरोध पैदा होता है। प्रभारी कुलसचिव को इस बारे में विशेष प्रशासनिक जानकारियां भी नहीं होती हैं। कई बार गड़बड़ियां भी देखने को मिल चुकी हैं।
यह समझ से परे है कि विश्वविद्यालय में नियमित कुलसचिव की नियुक्ति शासन या विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं चाह रहा है। विश्वविद्यालय के नियमित कुलसचिव सुरेश चंद शर्मा 30 अगस्त 2022 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। फिलहाल कुलसचिव का प्रभार फार्मोकोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. चंद्रवीर सिंह देख रहे हैं।
उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। कुलाधिपति तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं कुलपति डॉ. टी. प्रभाकर थे। शासन ने दो अगस्त 2016 को कुलसचिव के पद पर पीसीएस जितेंद्र प्रताप सिंह को नियुक्त किया था। लेकिन 28 दिन बाद उनका स्थानांतरण हो गया था। 10 दिसंबर 2016 को नए कुलसचिव पीसीएस सत्य प्रकाश पटेल बने। करीब छह महीने तक विश्वविद्यालय में सेवाएं देने के उनका छह जून 2017 को स्थानांतरण हो गया।
उनके बाद मार्च 2018 से कुलसचिव का प्रभार विश्वविद्यालय के चिकित्सक प्रो. डॉ.पीके जैन को सौंपा गया था। लंबे अंतराल के बाद छह जून 2019 को शासन ने पीसीएस सुरेश चंद शर्मा की नियुक्ति की थी। जिनक अगस्त 2022 को सेवानिवृत्त होने के बाद विश्वविद्यालय के डॉ. चंद्रवीर सिंह को कुलसचिव का प्रभार है।
वर्जन
शासन को पत्राचार के माध्यम से सूचना दी जा चुकी है। जल्द ही नियमित कुलसचिव की आने की संभावना है। – प्रभात सिंह, कुलपति प्रोफेसर
