इटावा। इटावा महोत्सव के प्रदर्शनी पंडाल में शुक्रवार की देर शाम आयोजित जनपदीय कवि सम्मेलन में वियों ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर वाहवाही लूटी। काव्य पाठ का शुभारंभ दीप चंद त्रिपाठी निर्बल ने मां सरस्वती वंदना से किया। कवि सम्मेलन में सुनील अवस्थी ने इस मिट्टी की खातिर अपना फर्ज निभाऊंगा। जब तक तन मैं सांस रहेगी वंदे मातरम गाऊंगा… देशभक्ति का जोश भरा।
भरथना से आए महेश मंगल ने राज हमसे हमेशा छुपाए गए, कुछ नजारे थे और कुछ दिखाए गए। डॉ.मंजू यादव ने भले ही साथ हो सारा जमाना पर न जाने क्यों, मुसीबत में हमेशा मां तेरी ही याद आती है। भरथना के कवि अनिल दीक्षित ने बेटा तुझे खिलौना मैं कल दिलवा ही दूंगा, झूठ बोलकर बच्चों को बहलाना पड़ता है।
गोविंद माधव शुक्ल ने हम अंधेरों में भी जी लिए, तेरी यादों के लेके दिए। तुम आइना ही समेटे रहे, हम जिए दोस्ती के लिए। युवा कवि रोहित चौधरी ने मैं सिंह गर्जना खुद की ताकत रखता हूं, वंदे मातरम् होठों पर और दिल में भारत रखता हूं। शिव गोपाल अवस्थी ने व्यथा लिख- लिख कर समंदर बन गई आंखें। धुआं सा उड़ गए सब, ख्वाब खंडहर बन गए।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम शंकर शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर व दीप जलाकर किया। अध्यक्षता बृजानंद शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कवि कमलेश शर्मा, प्रसिद्ध गजलकार अशोक यादव उपस्थित रहे। संयोजक विशंभर नाथ भटेले, सह संयोजक सुरेश चंद्र दुबे ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. सुशील सम्राट ने व द्वितीय सत्र का संचालन गिरीश बाबू पांडेय ने किया।
कवि सम्मेलन में देवेश अवस्थी, अनिल दीक्षित, गोविंद माधव शुक्ला, श्रीराम राही, अवधेश भ्रमर, प्रेम नारायण त्रिपाठी, रोहित चौधरी, शिव गोपाल अवस्थी, उमा दीक्षित, वंदना तिवारी, डॉ. मंजू यादव, सुनील अवस्थी, महेश मंगल, सत्य नारायण शर्मा, हर्ष शर्मा, प्रशांत तिवारी, अमरनाथ दीक्षित, हर्ष सक्सेना, मेधावसु पाठक आदि कवियों ने काव्य पाठ किया।
