इटावा। जिले भर में खरीद केंद्र खुल जाने के 20 दिन बाद भी केंद्रों पर धान की आवक रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। अभी तक सिर्फ 0.24 फीसदी धान ही खरीदा जा सका है। एक ओर जहां किसान सरकारी पचड़े से बचने के लिए केंद्रों का रुख नहीं कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिले में मोटे धान की उत्पादकता कम होने का भी असर नजर आ रहा है।
बीते कुछ वर्षों से जिले में बासमती धान की पैदावार बढ़ गई है। जिले में धान का कुल रकबा 50,999 है। इसमें पतले धान का करीब 16 हजार रकबा है। बचे रकबे में शंकर और मोटा दोनों तरह के धान समाहित हैं। मोटे धान का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। बासमती धान पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों में भेजा जाता है। सरकार मोटा धान खरीदती है। बासमती धान की अच्छी कीमतें मिलने के कारण किसानों ने मोटे धान की उत्पादकता कम कर दी है।
एक नवंबर से धान की खरीद के लिए जिले में 39 खरीद केंद्र खोले गए थे। इसमें 17 केंद्र ऐसे हैं, जिन पर बोहनी नहीं हुई है। 50 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 120 मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी है। सरकारी खरीद के लिए सामान्य धान का मूल्य 2183 और ग्रेड वन का मूल्य 2203 रुपये क्विंटल निर्धारित किया गया है।
केस 1- नवीन मंडी इटावा
इटावा मंडी में सिर्फ खरीदा गया सात सौ क्विंटल
इटावा। शहर की नवीन मंडी में खाद्य विभाग ने चार खरीद केंद्र बनाए गए है। केंद्र प्रभारी सावन कुमार ने बताया मंडी के चारों केंद्रों पर लगभग सात सौ क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। शुरुआत में कम किसान आ रहे थे, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है और आवक बढ़ी है।
केस 2-धान मंडी भरथना
हजारों किसान आते मंडी, पर 213 क्विंटल ही खरीद::::
भरथना। नगर की मंडी में बड़ी मात्रा में धान की आवक है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में किसान धान की बिक्री के लिए मंडी पहुंचते हैं। मंडी के तीन केंद्रों पर अभी तक सिर्फ 213 क्विंटल धान ही खरीदा जा सका है। प्रभारी राजेश कुमार और जितेंद्र सिंह ने बताया है कि केंद्र पर दो-दो किसानों ने धान विक्रय किया है।
केस 3- मंडी समिति जसवंतनगर
जसवंतनगर के पांच केंद्रों पर सिर्फ आठ सौ क्विंटल धान पहुंचा
जसवंतनगर। इस मंडी में शासन की ओर से पांच केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर धान की खरीद का लक्ष्य 42 हजार क्विंटल रखा गया है, लेकिन अभी तक सिर्फ आठ सौ क्विंटल धान ही खरीदा जा सका है। सचिव रवि प्रताप ने बताया कि मंडी समिति में प्रतिदिन ढाई सौ क्विंचल कॉमन धान की आवक है और लगभग एक हजार क्विंटल बासमती धान की आवक है।
किसानों की बात
ग्राम कोकावली के किसान ज्ञान सिंह ने बताया कि वह 150 क्विंटल धान सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने गए थे, लेकिन नमी के चलते धान नहीं खरीदा गया। ऐसे में मजबूरी में आढ़त पर भेज दिया। सिसहाट निवासी राकेश कुमार ने बताया कि वह 190 क्विंटल धान लेकर आए थे, लेकिन क्रय केंद्र पर पड़ताल ज्यादा की जाती है। इसलिए आढ़तियों के पास धान बेचकर घर जा रहे हैं। बहारपुर निवासी किसान सुभाष शाक्य ने बताया कि सात बीघा खेत में पतला धान लगाया था। इसे मंडी में आढ़ती को बेचा है। क्योंकि पतला धान सरकारी केंद्र पर नहीं खरीदा जाता है। ऊमरसेडा के किसान गोपाल तिवारी का कहना है कि उन्होंने 30 बीघा धान की फसल बोई थी। पूरा धान बासमती है, जो निजी आढ़तियों को बेच दिया है।
वर्जन
जिन केंद्रों पर धान की आवक नहीं हुई है। उनके प्रभारियों को खरीद में सक्रियता बरतने के निर्देश दिए है। किसी भी केंद्र पर किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद भी किसान को खरीद से संबंधित कोई समस्या है तो वह शिकायत कर सकते हैं। -लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
