इटावा। सरकार किसानों को लगातार ऋण सुविधा देकर सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। इसमें सबसे ज्यादा जोर केसीसी बनाने पर है। सरकार का उद्देश्य है कि किसान सस्ती ब्याज दर पर ऋण लें और अपनी फसल की बेहतर पैदावार लें। बार-बार बदलते मौसम की मार और खेती से अपेक्षित लाभ न मिलने की सजा भुगत रहे किसानों को अब किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से लिए गए रुपये जमा करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस समय जिले के 25013 किसानों के पास केसीसी है। इन केसीसी पर किसानों को सितंबर तक 49490.76 लाख रुपये जारी किए गए हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों के लिए केसीसी की धनराशि जमा करना मुसीबत का सबब बन गया है। एक ओर जहां किसान फसलों के अच्छे उत्पादन की बांट जोह रहा है। वहीं, दूसरी ओर उसे बैंकों से मिल रहे संदेशों का डर भी खाए जा रहा है। जानकारों के अनुसार, केसीसी धारक किसान को फसल बीमा की लाभ भी दिया जाता है। बीमा कंपनियों मानकों पर खरा न उतरने के कारण अधिकतर किसान योजना का लाभ नहींं ले पाते हैं और घाटे में चले जाते हैं। डीडी कृषि आरएन सिंह ने बताया कि केसीसी धारक सभी किसानों का बीमा होता है। उन्हें फसल नुकसान पर नियमानुसार मुआवजा देने का भी प्रावधान है। यदि कहीं किसी किसान को परेशानी है तो वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

किसानों की बात

चकरनगर क्षेत्र के मर्दानपुरा निवासी राजा सिंह ने बताया कि ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से केसीसी बनवाया था । दो लाख में डेढ़ लाख रुपये का भुगतान हुआ था। हर वर्ष फसल बीमा कट रहा है, लेकिन आज तक फसल नुकसान होने के बाद भी कोई सहूलियत नहीं मिली और न ही मुआवजा मिल सका। तेड़ाडाडा निवासी किसान आशाराम सिंह का कहना है कि चार वर्ष पहले केसीसी बनवाई थी। उस समय फसल का बीमा भी हुआ था। कई बार मुआवजे के लिए गुहार लगाई, लेकिन हासिल कुछ नहीं हो सका। अब बैंक वाले भी रुपये जल्दी जमा कराने की बात कह रहे हैं। नगला लछी निवासी जर्मन सिंह ने बताया कि उन्होंने पूर्वांचल बैंक से दो साल पहले किसान क्रेडिट कार्ड से करीब एक लाख रुपये का लोन लिया था। फसल में नुकसान होने के बाद भी किसान बीमा का फायदा नहीं मिला। अब लोन चुकाने में परेशानी हो रही है। ग्राम सुखैया हवेली निवासी हरिचरण तिवारी ने बताया कि उन्होंने पूर्वांचल बैंक ताखा से किसान क्रेडिट कार्ड से लगभग एक लाख रुपये का लोन लिया था। बैंक ने बीमा भी किया, पर कोई लाभ नहीं मिला। फसल भी अच्छी नहीं हुई है। ऐसे में लोन कैसे चुकाए इसकी चिंता लगातार सता रही है।



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