क्षेत्रीय किसानों को अपनी फसलों को बेचने के लिए दूसरी मंडियों में जाना पड़ता

फोटो 34 नाथूराम

फोटो 35 जयवीर

संवाद न्यूज एजेंसी

ताखा। तहसील क्षेत्र में सरकारी गल्ला मंडी के न होने से क्षेत्रीय किसानों को अपनी फसलों को बेचने के लिए दूसरी मंडियों में जाना पड़ता है। इससे किसानों को समय के साथ ज्यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। किसानों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से भी अपनी मांग रखी, लेकिन मंडी का निर्माण नहीं हो सका।

क्षेत्र के 42 ग्राम पंचायतों में लगभग चार लाख की आबादी रहती है। लेकिन मंडी न होने से किसानों को आढ़तियों व दूरदराज की मंडियों में जाकर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। तहसील क्षेत्र के प्रमुख कस्बा ऊसराहार में अधिकतर किसान फसलों को बेचने के लिए यहां आते हैं।

गेंहू ,धान, सरसों और मक्का की बिक्री के लिए क्षेत्र के किसानों को इटावा,भरथना और मैनपुरी की मंडियों में जाना पड़ता है। माकपा नेता नाथूराम यादव ने बताया कि मंडी न होने से किसानों को धान और गेंहू की बिक्री के लिए भरथना, इटावा, मैनपुरी और जसवंतनगर की मंडियों में जाना पड़ता है। इससे किसानों का समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। मंडी के निर्माण से मजदूर वर्ग के लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

बोले किसान

1- किसान नाथूराम ने बताया कि क्षेत्र में गल्लामंडी न होने से फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। यहां से दूसरी मंड़ियाें की दूरी 20 से 50 किमी तक है। दूरी की वजह से किसान, आढ़तियों को अपनी फसल बेच देते है।

2- किसान जयवीर कश्यप का कहना है कि मंडी बनने से किसानों को बहुत लाभ होगा। सरकार तहसील क्षेत्र में मंडी बनाकर किसानों को मजबूत बनायें। अभी किसानों की फसलों को निजी आढ़ती ओने-पोने दामों में खरीद कर रहे हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *