भरथना। 29 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष 14 अक्तूबर तक चलेंगे। पितृ पक्ष में लोग पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए भोजनदान, जलदान और तर्पण कर रहे हैं। वहीं, कस्बे में बने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों में अपनो की बेरुखी साफ दिखाई दे रही है। बुजुर्गों का कहना है कि जब जीते जी अपने याद नहीं करते हैं तो मरने के बाद श्राद्ध कौन करेगा।

अपनों से ठुकराए गए वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग समाज को वास्तविकता का आइना दिखा रहे हैं। जीते-जीते इनके अपनों ने मुंह मोड़ लिया है। वर्षों से वह वृृद्धाश्रम में ही रहकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं। भरथना के मोहल्ला गिरधारीपुरा में संचालित वृद्धाश्रम में इस समय 44 महिला और पुरुष रह रहे हैं।

– 65 वर्षीय कमला देवी ने बताया कि पति की करतूतों से परेशान होकर भरथना स्थित मायके आ गईं थी। कुछ साल तो मायके में सही कट गए, लेकिन फिर भाभी को भी अखरने लगीं। रोज-रोज के कलह से परेशान होकर पांच साल पहले कमला वृद्धा आश्रम आ गईं। 90 साल की श्यामा यादव का कहना है कि उनके चार पुत्र व तीन पुत्रियां हैं। पति के निधन के बाद पुत्र वृद्धाश्रम में छोड़ गए। पांच वर्षों से यहीं पर हैं। कभी-कभी बाहर रह रहे पुत्र मिलने आते हैं। अब तो यही परिवार हो गया है।

जसवंतनगर के 65 वर्षीय दरोगा सिंह ने बताया कि इकलौता पुत्र है। वह पहले वृद्धाश्रम में ही नौकरी करता था। अब नौकरी के लिए बाहर चले जाने के कारण वह यही छोड़ गया है। एक साल से यही रह रहे हैं। इटावा के बैरून टोला निवासी धर्म सिंह ने बताया कि कुछ वर्ष पहले उनके मकान की छत ढहने से पत्नी व एक बेटी की मौत हो गई। दो बेटियों की शादी कर दी। एक पुत्र अपनी पत्नी समेत ससुराल में रहता है। अकेला होने के कारण पांच साल वृद्धाश्रम आ गए। पिछले पांच वर्षों से यहीं पर रह रहे हैं।

खातों में आती हैं पेंशन

वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्धों को पेंशन योजना के तहत पेंशन भी मिलती हैं। हेल्पिंग यूथ फाउंडेशन के तहत चलाए जा रहे इस आश्रम के लेखाकार ऋषि त्रिपाठी ने बताया कि कुछ लोगों के कागजों में कमी के कारण पेंशन नहीं मिल रही है। वृद्धजनों की सहूलियत के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।



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