Husain delivered on what he had promised... the pilgrims were left enthralled by his recitation.

फोटो 13:: दरगाह में कलाम पेश करते कव्वाल। स्रोत दरगाह कमेटी

इटावा। नाना का अपने वादा निभाया हुसैन ने, जो कह दिया वो करके दिखाया हुसैन ने… कव्वालों के इस कलाम पर दरगाह में मौजूद जायरीन झूम उठे। सूफियाना कलाम की गूंज और अकीदतमंदों की वाहवाही के बीच कटरा साहब खां स्थित दरगाह अबुल हसन शाह वारसी का 102वां चार दिवसीय सालाना उर्स रविवार को शुरू हुआ।


पहले दिन कुरान ख्वानी, चादरपोशी, मिलाद शरीफ, महफिले समां और कुल शरीफ के कार्यक्रम हुए। इनमें इटावा समेत दूसरे जनपदों और बाहरी प्रांतों से बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए। दरगाह के ऑनरेरी सचिव हसनैन वारिस उर्फ हनी वारसी के नेतृत्व में फज्र की नमाज के बाद कुरान ख्वानी से उर्स का आगाज हुआ। इसके बाद इमामबाड़ा शरीफ में हनी वारसी ने अलम पेश किया।

हजरत मजहर अली शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह की ओर से चादरें पेश की गईं और कुल शरीफ हुआ। जोहर की नमाज के बाद मिलाद शरीफ और अस्र की नमाज के बाद महफिले समां का आयोजन किया गया। इसमें देवा शरीफ के अफ्फान वारसी, रामपुर के मोहम्मद अहमद और बरेली के फैजान-जीशान कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। खासकर हुसैन की शान में पेश किए गए कलाम पर जायरीन झूमने लगे और देर तक वाहवाही करते रहे।

इसके बाद हजरत महमूद शाह वारसी का कुल हुआ। महफिले जिक्र सरकार वारिस पाक का आयोजन किया गया। अंत में महफिले समां के बीच हजरत सुल्तान हमीद वारसी और हजरत माशूक अली शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह का कुल शरीफ संपन्न हुआ। उर्स में शामिल होने आए जायरीन की सुविधा के लिए दरगाह की ओर से ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कैंप लगाया, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल तैनात रहा।



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