इटावा। अक्तूबर माह में डेंगू के मरीजों व लक्षण वाले मरीजों के निकलने के अलावा भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मंगलवार को दो दिन की एलाइजा जांच में छह मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें सैफई क्षेत्र के कुलदीप सिंह व विपिन, चितभवन की कांति देवी, सारंगपुरा की जया, नगला नवल की नीतू के अलावा महेवा की चंद्रप्रभा शामिल हैं।

मंगलवार को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में 75 मरीजों की एनएस-1 जांच हुई। इसमें 18 मरीजों में डेंगू के लक्षण मिले। इनमेंं जबरपुरा की सुधा, सिविल लाइन क्षेत्र सरला, घटिया अजमत अली के पंकज, अतरोई के अजय, जगे का नगला की सुनीता, कोकपुरा के हर्ष, नगला राठौर के अभिषेक, कोठी चंद्रपुर की आसमा, शाह कमर के नन्हे, आईटीआई के नजदीक रहने वाले संतोष आसमा अड्डा जालिम के अनूप यादव शामिल हैं। इन सभी में डेंगू के लक्षण पाए गए हैं।

अक्तूबर में 17 दिन के अंदर जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में डेंगू की एनएस-1 जांच में 164 मरीजों में डेंगू के लक्षण मिल चुके हैं। जबकि संक्रामक वार्ड में लक्षणों वाले भर्ती मरीजों की संख्या 24 है। चार नए मरीज मंगलवार को भर्ती कराए गए।

दूसरी ओर महिला एवं शिशु वार्ड में बुखार के 20 मरीज भर्ती हैं। इनमें 10 बच्चे व इतनी ही महिलाएं शामिल हैं। नवरात्र की वजह से इस सप्ताह जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है। सोमवार को मरीजों की संख्या 1230 थी, जबकि मंगलवार को ओपीडी में 1095 मरीज आए। हालांकि मरीजों की संख्या एक-एक हजार से ऊपर ही बनी हुई है। अक्तूबर महीने में पहले सप्ताह के दो दिन के अवकाश के बाद 1880 मरीज, दूसरे सप्ताह के पहले सोमवार को 1600 व तीसरे सप्ताह के सोमवार को 1230 मरीज आए।

इंफेक्शन होने से सात दिन होती है परेशानी

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजय शर्मा का कहना है कि इंफेक्शन होने पर मरीज को सात दिन परेशानी होती है। डेंगू में बुखार तेज होना, सिर, जोड़ों व हाथ पैर, पेट में दर्द होता है। लैट्रिन काली होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति में नजदीक के अस्पताल में मरीज को दिखाएं। प्लेटलेट्स चेक कराएं और हाईड्रेशन होने पर तरल चीजों का प्रयोग करें। डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि बचाव के लिए घर में कहीं पर भी पानी इकट्ठा न होने दें, क्योंकि पानी जमा होने पर एंटी लार्वा पैदा हो सकते हैं। घर की खिड़कियों को बंद रखें। फुल बांह के कपड़े पहने। मच्छरदानी का प्रयोग करें। बुखार आने पर लापरवाही कतई न बरतें।



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