इटावा। मौसम में उतार-चढ़ाव से वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से फैल गया है। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों में सबसे अधिक संख्या बुखार पीड़ितों की है। मरीजों को तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द और कमजोरी की शिकायत हो रही है लेकिन पैथोलॉजी जांच में न तो डेंगू की पुष्टि हो रही है और न ही मलेरिया निकल रहा है। इसके बावजूद मरीजों के खून में प्लेटलेट्स तेजी से नीचे गिर रही हैं जिससे लोगों को चलने-फिरने तक में परेशानी हो रही है।

जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना औसतन 380 से अधिक लोगों की खून की जांच की जा रही है। इनमें से 100 से ज्यादा मरीज वायरल बुखार की चपेट में मिल रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि यह एक विशिष्ट प्रकार का वायरल इंफेक्शन है जो सीधे तौर पर ब्लड प्लेटलेट्स पर असर डाल रहा है। प्लेटलेट्स अचानक घटकर 40 से 50 हजार तक पहुंच जा रही हैं, जिससे मरीजों के जोड़ों में दर्द और अत्यधिक थकान की समस्या बन रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीजों को खुद से कोई एंटीबायोटिक या पेनकिलर (दर्द निवारक दवा) खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। डॉक्टर जांच के बाद दवाएं देने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही बदलते मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही यदि बुखार तीन दिन से अधिक रहे या प्लेटलेट्स लगातार गिरें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी दवा न लें।

इन बातों का रखें ध्यान

शरीर में दर्द होने व थकान होने को हल्के में न लें। तीन दिन से अधिक बुखार आने पर पास के अस्पताल में तुरत जांच करवाएं। दिन में चार से पांच लीटर पानी, नारियल पानी और सूप का सेवन करें। पपीते के पत्ते का रस व पौष्टिक आहार लें, मसालेदार खाद्य पदार्थ से दूर रहें। मरीज को कम से कम पांच से सात दिन पूरी तरह से आराम करना चाहिए। बिना डॉक्टर के परामर्श के मेडिकल स्टोर से दवा न लें।



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