इटावा। देखरेख के अभाव में शहर का बुद्धा पार्क देखरेख के अभाव में बदहाली के आंसू बहा रहा है। लोगों की सहूलियत के लिए बसपा शासन काल में तैयार हुआ यह पार्क आज जंजीर और ताले में बंद होकर रह गया है। इसकी साफ-सफाई से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को देखने वाला कोई नहीं है। नतीजतन करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पार्क लोगों के किसी काम का नहीं है।

वर्ष 1997 में प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस पार्क का शुभारंभ किया था। कुछ वर्षों तक पार्क की व्यवस्थाएं काफी अच्छी रहीं। आसपास के सैकड़ोंं लोग शुबह-शाम पार्क में टहलने के लिए आते थे और दिन के समय बच्चे क्रिकेट, वॉलीबॉल सहित तमाम खेल खेलते थे। दिन बीतने के साथ ही पार्क बदहाल होता चला गया और अब यह अराजक तत्वों का जमावड़ा बन गया है।

देश और प्रदेश में साफ-सफाई के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे है, लेकिन परिसर में साफ-सफाई का नामोनिशान ही नहीं है। जगह-जगह प्रयोग किए गए गिलास और पानी के पाउच पड़े है। लोंगों के टहलने के लिए बनाया गया पथ मार्ग घास के कारण दिखाई नहीं दे रहा हैं। बड़ी-बड़ी घास के कारण पार्क में कीट-पतंगे भी पनप रहे है। टहलने के लिए बनाए गए पथ टूटने लगे है। मुख्य दरवाजे के पास बड़ी मात्रा में रखे पत्थर अपने बिछाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

बदहाली और असुरक्षित होने के कारण आज लोग दिन में जाने से भी डरते है। सिर्फ नुमाइश के समय ही मामूली रुप से इसकी साफ सफाई करवाकर खानापूर्ति कर ली जाती है। पार्क को नया लुक देने के लिए उसमें झूलों समेत जिम और कैंटीन बनाए जाने की बात कही गई थे। नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन नौसावा खानम ने बताया कि वर्ष 2018 में इस पार्क का सुंदरीकरण कराया गया था। जिसमें साफ- सफाई से लेकर ग्रिल और अन्य मरम्मत सहित कई कार्य करवाए गए थे।

अगर पार्क की साफ-सफाई करवाकर शुबह-शाम एक निश्चित समय के लिए खोला जाए ताकि लोगों को सहूलियत मिले और पार्क बदहाल न हो। वर्ष 2022 में वर्तमान विधायक सरिता भदौरिया और तत्कालीन पालिका अध्यक्ष ने पार्क का जीर्णोद्धार कराया गया। एक वर्ष बीतने के बाद ही पार्क देखरेख के अभाव में बदहाल हो गया। ईओ नगर पालिका विनय मणि त्रिपाठी ने बताया कि कुछ माह पहले साफ-सफाई सहित कुछ काम करवाए गए थे । फिर से प्रस्ताव भेजा गया है नुमाइश से पहले पार्क को व्यवस्थित करवा लिया जाएगा।

बुद्धा पार्क पहले हुआ करता था तालाब

नुमाइश पंडाल के पास बना बुद्धा पार्क वर्ष 1997 के पहले एक तालाब हुआ करता था। प्रदर्शनी के दौरान इसमें आतिशबाजी की जाती थी। जनपद समेत आसपास के लोग इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचते थे । 19 जून 1997 को यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री ने गौतम बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण करके पार्क आम लोगों के लिए खोल दिया था।

लोगों की बात

संजय यादव ने बताया कि पार्क की साफ-सफाई करवानी चाहिए, ताकि आसपास के लोग उसमें व्यायाम कर टहल भी सकें। लेकिन समय के साथ खुलना और बंद होना भी जरूरी हैं। क्योंकि अनावश्यक रूप से खुलने पर पार्क में अव्यवस्था होगी। नरेशचंद्र का कहना है कि पार्क के व्यवस्थित होने से बच्चों सहित सभी लोगों को सहूलियत होगी। अगले माह नुमाइश की शुरुआत हो जाएगी । आसपास के हजारों लोग पहुंचते है । व्यवस्थित होने से ये लोग पार्क में घूम सकते हैं।



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