इटावा/चकरनगर। तहसील क्षेत्र के गांव नौगांवा और अंदावा गांव के मध्य यमुना पर अभी तक पैंटून पुल नहीं बनाया जा सका है। लोक निर्माण विभाग और सेंक्चुअरी विभाग में आपसी तालमेल न बनने के कारण पैंटून पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इससे 100 से अधिक गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शासन के निर्देश पर अक्तूबर में यमुना नदी पर पैंटून पुल बन कर तैयार होना चाहिए था, लेकिन दो माह बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। लोकनिर्माण विभाग और चंबल सेंक्चुअरी के अधिकारियों के आपसी सामंजस्य न बन पाने के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। दोनों विभाग के जिम्मेदार एक दूसरे के पाले में गेंद डालकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। विभागों की लापरवाही का खामियाजा आसपास के गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। इससे किसी भी दिन हादसा भी हो सकता है। शरद भदौरिया, शिशुपाल गुर्जर, अरुण चौहान , प्रदीप राजावत, गोपालपुरा, इशू दीक्षित, संजय यादव, राजेश कुमार, दशरथ सिंह, जगमोहन सिंह ने जिला प्रशासन से पुल का निर्माण कराए जाने की मांग की है।
30 से 35 किमी का चक्कर लगाकर तहसील पहुंचते ग्रामीण
महेवा ब्लॉक के गांव अंदावा की मड़ैया, यादवान की मड़ैया, पुरा मल्लाहन, विनायकपुर, लालपुर, पुरावली, रतनपुर, मेहंदीपुर, लाखी, गंगदासपुर, ढकाताल, दिलीपनगर सहित कई गांवों के लोग चकरनगर तहसील में जाने के लिए बकेवर-लखना के रास्ते 30 से 35 किमी का चक्कर लगाकर जाते है। इससे उन्हें अतिरिक्त धन और समय गंवाना पड़ता है। जबकि इस पुल के बनने से नौगांवा से होते हुए चकरनगर तहसील पहुंचने के लिये नौ से दस किमी की दूरी ही तय करनी पड़ेगी। दूसरी ओर चकरनगर ब्लाॅक के लोगों को अजीतमल- औरैया जाने के लिए 50 किमी का चक्कर लगाकर अपने गंतव्य पर पहुंचते है।
कंधेशी घार पर नाव पलटने से हुई थी दस लोगों की मौत
चकरनगर थाना क्षेत्र के गांव कंधेसी घार के नजदीक फरवरी 2013 में निमंत्रण खाकर लौट रहे लोग नाव से यमुना नदी पार कर रहे थे। तभी अचानक नाव पलट गई और उसमें सवार दस लोगों की मौत हो गई थी।
यमुना नदी में नाव पलटने दो मासूमों की हुई थी मौत
बीहड़ के गांव मचल की मड़ैया के पास यमुना नदी में नाव पलटने से दो बच्चों की मौत हो गई थी। 9 मई 2020 को अजीतमल थाना क्षेत्र के कुछ लोग लॉकडाउन में चोरी छुपे अपने घर बवाइन औरैया जा रहे थे। नदी पार करते समय नाव पलटने से दो बच्चों की मौत हो गई थी।
लोगों की बात
वरिष्ठ अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान कहते हैं कि पीपा का पुल कुछ महीनों ही लोगों को सुख देता है। इससे बड़े वाहन भी नही निकल पाते है। सरकार को यहां स्थायी पुल का निर्माण कराना चाहिए। इससे कई गांवों के लोगों को सहूलियत मिलेगी। नौगावां निवासी गणेश शंखवार ने बताया कि क्षेत्र में दावत होने पर बड़ी संख्या में लोग नाव पर सवार होकर जाते हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शासन को जल्द अस्थायी पीपों के पुल का निर्माण करना चाहिए। ग्राम अंदावा के प्रधान चरन सिंह यादव ने बताया कि पुल के संबंध में कई बार लिखित शिकायत कर चुके हैं। फिर भी अस्थायी पुल बनाने का काम शुरू नही हुआ। इससे लोगों को चकरनगर तहसील पहुंचने के लिए 30 से 35 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।ब्लाॅक प्रमुख प्रतिनिधि राकेश यादव ने बताया बीहड़ क्षेत्र चकरनगर के लोगों की समस्या को देखते हुए सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने पिपरौली गढ़िया जन चौपाल के दौरान जल्द अस्थायी पुल बनाने के लिए कहा था। इसके लिए वह फिर से सांसद से कहेंगे।
जिम्मेदार आमने-सामने
नौगावां घाट पर पैंटून पुल की अभी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति के लिए भेजा है। सेंक्चुअरी विभाग की स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलते ही पुल बनाने का कार्य किया जाएगा। – संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
सेंक्चुअरी विभाग ने अक्तूबर में ही पुल के लिए अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन लोकनिर्माण विभाग की उदासीनता के कारण पुल नहीं बन पा रहा है। जबकि पैंटून पुल अक्तूबर में बन जाना चाहिए था। – केके त्यागी, रेंजर सेंक्चुअरी क्षेत्र
