फोटो 37::::बोगी की आग बुझाने के लिए पानी डालती फायर ब्रिगेड टीम संवाद
फोटो 40:::ओएचई को चेक करने जाता यांत्रिक कर्मचारी। संवाद
फोटो 41:::बोगी से निकाल कर रखे गए सामान को तलाशते युवक। संवाद
फोटो 42:::जली हुई बोगियों से काटकर अलग की गई ट्रेन। संवाद
फोटो 43::यात्रियाें को सांत्वना देकर उनके गंतव्य को जाने के लिए कहते एसएसपी संजय कुमार वर्मा। संवाद
फोटो 44::घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे एडीएम, एसडीएम व एसपी सिटी। संवाद
फोटो 45:::धू-धू कर जलती क्लोन एक्सप्रेस ट्रेन की बोगी। संवाद
फोटो 46::निशा देवी
फोटो 47:बबीता देवी
फोटो 48:कृष्ण मोहन
फोटो 49:गोविंद कुमार
फोटो 53:::जिला अस्पताल में इलाज कराते हुए आग से झुलसे घायल। संवाद
फोटो 35::::आग से जलने के बाद बोगी में छूटा यात्रियों का सामान। संवाद
फोटो 53:::जिला अस्पताल में इलाज कराते हुए आग से झुलसे घायल। संवाद
फोटो 54:: जिला अस्पताल में आग से झुलसीं सुनीता इलाज के लिए जाती हुई। संवाद
फोटो 55::घायल हरेंद्र यादव
फोटो 36:::घायल दयानंद
फोटो 37:::घायल रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
जसवंतनगर/इटावा। शाम करीब साढ़े पांच बज रहा था। एस-1 कोच में कुछ यात्री अपनी सीटों पर बैठे तो कुछ दरवाजे पर खड़े होकर बातें कर रहे थे। इस बीच ही अचानक तेज धमाके के साथ तेज लपटें उठना शुरू हो गईं। आवाज सुनकर और लपटें देखकर भगदड़ मच गई, लोग अपनी सीटें छोड़कर भागने लगे।
दिल्ली से गोरखपुर अपने भाई भीम के साथ जा रहे गोविंद कुमार भी एस-1 कोच में 48 नंबर सीट पर सवार थे। उन्होंने बताया कि ट्रेन की चेन पुलिंग होते ही सबने गेटों से कूदना शुरू कर दिया। वह ट्रेन से कूद गए, लेकिन उनका भाई भीड़ फंस गया। धक्कों के बीच किसी तरह भाई को खींचकर बाहर निकाला। सामान और जूते चप्पल वहीं रह गए। उन्होंने बताया कि अचानक से 20 से 30 नंबर सीट से आग की लपटें उठने लगीं थीं। हादसे के वक्त लगा जैसे कोई पटाखे की वजह से आग लगी हो।
दरवाजे के बजाए खिड़कियों से कूदे लोग
एस-1 कोच में यात्रा कर रहे मुजफ्फरपुर निवासी कृष्ण मोहन ने बताया कि वह अपने परिजनों के साथ सीट नंबर 5 और 6 पर बैठे थे । तभी अचानक से अफरा तफरी का माहौल हो गया। भीड़ इतनी अधिक थी कि ट्रेन से उतरने में भी लोग गिरने लगे। भीड़ इतनी अधिक थी कुछ लोग दरवाजे की बजाय खिड़कियों से निकले।
सामान से ज्यादा जरूरी है जान
नई दिल्ली से ट्रेन के एस-3 कोच में बैठी निशा देवी ने बताया कि उन्होंने पांच टिकट बुक करवाए थे। शयनयान में आरक्षण होने के बाद भी बैठकर यात्रा कर रहे थे।अचानक से झटके के साथ ट्रेन रुकी और लोग भागते नजर आए। वह भी अपने बच्चों के साथ ट्रेन से उतर गई । उनका सामान उसी में रह गया। उन्होंने लड़खड़ाती जुबान से कहा कि सामान से ज्यादा जान जरूरी है।
सामान छोड़कर ट्रेन से कूदी बबीता
यात्री बबीता ने बताया कि वह एस-4 कोच में यात्रा कर रही थी। नॉन स्टॉप ट्रेन अचानक से रुक गई।जब तक कुछ समझते तब तक लोग ट्रेन से कूदने लगे। उन्होंने भी अपने सामान को छोड़कर जान बचाई। हालांकि आग उनके कोच से काफी दूर थी लेकिन उस वक्त कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करें।
…और कर्मचारियों की जल्दबाजी से परेशान रहे यात्री:::::
आग की घटना के बाद ट्रेन के जले हुए चार कोचों को अलग कर दिया गया था। जिला प्रशासन और रेलवे के अधिकारियों ने स्टेशन पर बैठे यात्रियों को उसी ट्रेन में बैठाया। इस दौरान स्टेशन पर अपने परिजनों का इंतजार कर रहीं रेखा से कर्मचारी ट्रेन में बैठने की जिद्द करते रहे, जबकि उनका कहना था कि वह इधर, उधर हुए अपने परिवार के लोगों को तलाश रही हैं।
क्रासिंगें बंद रहने से परेशान रहे लोग::::
हादसे के दौरान करीब तीन घंटे तक जिले में पड़ने वालीं रामनगर फाटक, सरायभूपत समेत सभी क्रासिंग बंद रहीं। लगभग पांच क्रासिंगें बंद रहने से लोगों को घंटों जाम की समस्या से भी जूझना पड़ा।
