सैफई। संजय गांधी स्नोतकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में लगी आग में दो लोगोें की मौत होने के बाद अमर उजाला ने आयुर्विज्ञान विवि के आग बुझाने के उपकरणों की पड़ताल की। तब पता चला कि फायर अलार्म खराब और सिलिंडर भी कबाड़ हो गए हैं। ऐसे में आयुर्विज्ञान विवि पैरामेडिकल पुरुष और महिला हॉस्टल में यदि आग लगी तो बुझाना मुश्किल हो जाएगा।
आयुर्विज्ञान विवि में प्रतिदिन करीब तीन हजार मरीज ओपीडी में दिखाने आते हैं। वहीं, इमरजेंसी में भी छह सौ से सात सौ मरीज आते हैं। करीब बड़ी संख्या में मरीज भर्ती भी हैं। यहां पर लगे आग बुझाने के उपकरण सही हैं, लेकिन विवि परिसर में ही बने पैरामेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला हॉस्टल के लगभग सभी उपकरण खराब हो गए हैं।
देखा गया कि 10 फायर अलार्म खराब हैं। हाइडेंट बॉक्सों में पानी का डालने का पाइप ही गायब हो चुका है। अधिकांश सिलिंडर खराब हैं। बचे हुए जो सिलिंडर सही और भरे भी हैं उनके पाइप गायब होने से वह बेकार हो चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, हर साल पूरे परिसर में आग की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए शासन से 25 लाख रुपये सालाना का बजट भी खर्च दिखाया जाता है। इसके बावजूद पुरुष और महिला हॉस्टल में इंतजाम ध्वस्त पड़े हैं। इन दोनों हॉस्टलों में लगभग ढाई हजार छात्र-छात्राएं रह रहे हैं। ऐसे में यदि आग लगती है तो इन छात्र-छात्राओं की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाएगी।
मेडिकल कॉलेज का विद्युत पैनल भी खराब
मेडिकल कॉलेज में टिनशेड पार्किंग के पाास बने विद्युत पैनल भी लंबे समय से खराब है। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज में आग लगी तो पंप तेजी से पानी नहीं फेंक सकेगा और आग काबू करना मुश्किल हो जाएगा। इस स्थिति में लैब में जांच कराने आने वाले मरीजों, स्टाफ और यहीं न्यू कैंपस में बने वरिष्ठ चिकित्सकों की जान खतरे में पड़ सकती है।
सात साल पहले लगे उपकरण, नहीं कराई गई टेस्टिंग
मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज में लगभग सात साल पहले आग बुझाने के करोड़ों रुपये के उपकरण लगवाए थे। सूत्रों के अनुसार, उस समय टेस्टिंग होने के बाद से आज तक कभी दोबारा टेस्टिंग नहीं कराई गई है। ऐसे में इन उपकरणों का मेंटीनेस नहीं हो सका और यह कबाड़ हो गए।
वर्जन
पैरामेडिकल कॉलेज की फायर संबंधी अव्यवस्थाओं की जानकारी की जाएगी। संबंधित जिम्मेदारों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे। -डॉ. चंद्रवीर सिंह, प्रभारी कुलसचिव
