बकेवर। गेहूं की बुआई के समय सहकारी समितियां पर किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है। इसके कारण किसानों को गेहूं की बुआई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बकेवर स्थित सहकारी समिति पर 25 दिनों से किसान डीएपी खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन डीएपी न मिलने से किसान परेशान हैं। केंद्र पर डीएपी के विकल्प के रूप में भेजी गई एनपीके खाद भी बीते दो दिनों से खत्म हो गई है।
किसान रामअवतार और गजेंद्र सिंह ने बताया कि खाद की कमी के कारण खेतों में नमी खत्म होती जा रही है। जिले में अभी 200 मीट्रिक टन डीएपी खाद उपलब्ध है, लेकिन बकेवर केंद्र पर 25 दिन से नहीं भेजी गई हैं। प्रशासन ने कई केंद्रों पर एनपीके खाद भेजी है। पिछले 25 दिनों से इस समिति के अलावा उरेंग, महेवा, मेहंदीपुर और लाखी सहकारी समितियां व सहकारी संघों पर किसानों को डीएपी खाद गेहूं की बुआई के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
किसान डीएपी खाद के लिए समितियों पर चक्कर लगा रहे हैं। केंद्रों पर खाद न होने के कारण मजबूरी में किसान निजी दुकानों से खाद खरीदने को मजबूर है। किसानों के अनुसार, एनपीके खाद का उपयोग आलू की बुआई में कर लेते है लेकिन गेहूं की बुआई में इसका प्रयोग करने से सकुचाते है। किसान आशुतोष, मातादीन, लालाराम, सुरेंद्र, रामसनेही और गोविंद ने बताया कि सहकारी समितियों पर डीएपी खाद नहीं है। रोजाना समितियों पर खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन, खाद उपलब्ध ही नहीं हैं। समिति के सचिव राजीव गोयल ने बताया कि अभी रैक नहीं आयी है। खाद आते ही वितरित की जाएगी।
वर्जन
डीएपी खाद की रैक चल दी है। मंगलवार तक खाद की रैक इटावा आ जाएगी। अभी 200 मीट्रिक टन डीएपी खाद कुछ समितियों पर उपलब्ध है। बकेवर समिति पर डीएपी भेजी जा रही है। -प्रदीप सिंह, एआर कोऑपरेटिव।
