संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा

Updated Sat, 28 Oct 2023 12:35 AM IST

इटावा। जिले में पहली बार सिटीजन एक्ट के मामले में वरिष्ठ नागरिक और पिता के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला आया है। 20 अक्तूबर को सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय ने फैसले में कहा कि वरिष्ठ नागरिक की स्वयं की अर्जित संपत्ति से निर्मित जायदाद में बच्चे बिना उनकी इच्छा के नहीं रह सकते। यानी वह वरिष्ठ के नागरिक मकान को शांतिपूर्वक खाली कर दें।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं संरक्षण अधिनियम 2007 जिसे आम भाषा में सीनियर सिटीजन एक्ट कहते हैं। न्यायालय ने इस संबंध में सदर कोतवाली प्रभारी को आदेश दिया है कि वरिष्ठ नागरिक को शांतिपूर्वक मकान का कब्जा दिलाएं। सदर कोतवाली क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक/पिता राजेंद्र कुमार ने सीनियर सिटीजन एक्ट के अंतर्गत अपने पुत्र अमित कुमार पर उन्हें उत्पीड़ित करने उनकी देखभाल न करने और जबरन उनके खरीदे गए मकान में रहने का वाद दाखिल किया था।

वरिष्ठ नागरिक की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता आशुतोष दीक्षित ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को जान-माल और उनकी संपत्ति के संरक्षण में यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि भरण-पोषण के अतिरिक्त अन्य प्रावधानों तथा धारा-21 और 22 के तहत जानमाल और संपत्ति की सुरक्षा/संरक्षण आदि के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों के प्रत्यायोजन के जरिए सशक्त किया अधिकारी/मजिस्ट्रेट इसकी सुनवाई करने के लिए एक्ट की सक्षम न्यायालय है।

एडवोकेट ने बताया कि हाल ही में उच्च न्यायालय ने गत 25 मई को ही उपरोक्त एक्ट के अंतर्गत शिवानी वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य के मामले में फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि एक वरिष्ठ नागरिक जिससे उसके बच्चे दुर्व्यवहार करते हैं उनसे अपने मकान/जायदाद खाली कराने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे अधिक से अधिक सीनियर सिटीजन के मकान/जायदाद में एक लाइसेंसी की हैसियत से रहते हैं। बच्चों के सीनियर सिटीजन के मकान/जायदाद में रहने का लाइसेंस उसी समय समाप्त हो जाता है, जब उनसे सीनियर सिटीजन की ओर से मकान/जायदाद खाली करने के लिए कहा जाता है।



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