सैफई (इटावा)। सैफई आयुर्विज्ञान विवि के पेसमेकर घोटोले के आरोपी सर्जन ने 2019 में कैथ लैब के करीब एक करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे थे। जांच में मामला सामने आने पर तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक की रिपोर्ट पर तत्कालीन कुलपति ने भुगतान पर रोक लगा थी।
सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर समीर सर्राफ की 2016 में मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किए गए थे। शिकायतों के बाद तत्कालीन कुलपति डॉ. राजकुमार की ओर से बनाई गई डॉ. अमित सिंह की एक सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसमें कैथ लैब के करीब एक करोड़ रुपये के उपकरण खरीदने की बात सामने आई थी। यह भी पता चला था कि उक्त सभी सामान स्टोर में लगभग एक से डेढ़ साल के लिए पहले से ही उपलब्ध थे। इसके बावजूद मनमानी दिखाते हुए आरोपी सर्जन ने आर्थिक लाभ के लिए इतनी बड़ी खरीद की।
इसके बाद जांच को निष्पक्ष रखने के लिए एक पांच सदस्यीय टीम से फिर जांच कराई गई थी। इसका अध्यक्ष तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार को बनाया गया था। उनकी जांच में भी यही तथ्य सामने आए थे। एक अन्य अधिकारी के शामिल होने का भी पांच सदस्यीय टीम ने दावा किया था। डॉ. आदेश ने तत्कालीन कुलपति डॉ. राजकुमार को भुगतान पर रोक लगाने के लिए पत्र लिखा था। 25 नवंबर 2020 को 93 लाख तीन हजार 181 रुपये के भुगतान पर तत्कालीन कुलपति ने रोक भी लगा दी थी। इसके बाद आगे की जांचें चलती रहीं।
वर्तमान कुलपति प्रो. प्रभात सिंह ने कई अन्य तथ्य सामने आने के बाद मार्च-अप्रैल 2023 में फर्म का भुगतान कराने के आदेश दिया था। वहीं हृदय रोग विभाग बंद होने की वजह से मरीजों की परेशानी को देखते हुए डॉ. समीर सर्राफ को बहाल भी कर दिया था। उधर, डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद विवि प्रशासन में खलबली मची हुई है। देर रात तक बैठकों के दौर चल रहे हैं।
आयुष्मान कार्ड धारकों से भी रुपये भी वसूलने का भी आरोप
आरोपी सर्जन डॉ. समीर सर्राफ पर टीमों और पुलिस टीम की जांच में आयुष्मान कार्ड धारकों को भी इलाज के नाम पर रुपये वसूलने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर मरीज को आयुष्मान से पेसमेकर लगाने के बाद उसकी गुणवत्ता खराब होने की बात कहकर नया पेसमेकर लगवाकर लाखों रुपये कमा लेते थे।
