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– अस्पताल के बाहर और परिसर 50 निजी एंबुलेंस चालक अस्पताल के बाहर डेरा डाले रहते
– एंबुलेंस चालक बेहतर और सस्ते इलाज का झांसा देकर मरीज को निजी अस्पताल ले जाए जाते
– मेडिकल कॉलेज के स्टाफ की ओर से पुलिस को लिखा गया पत्र, पर अभी तक कार्रवाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सैफई। मरीजों को बेहतर और सस्ते इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों तक ले जाने की शिकायत पर भले ही जिला अस्पताल में मंगलवार रात अधिकारियों ने कार्रवाई की हो, लेकिन मेडिकल कॉलेज में भी निजी एंबुलेंस चालकों का गुट मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल में ले जाने का काम कर रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस से कई बार लिखित शिकायत भी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई न होने से एंबुलेंस संचालकों की मनमानी जारी है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में प्रतिदिन लगभग छह सौ सात सौ मरीज दिखाने के लिए आते हैं। इनमें से अधिकांश मरीज गंभीर स्थिति में होते हैं। इन लोगों को लाने-ले जाने के लिए मेडिकल कॉलेज के पास पर्याप्त सरकारी एंबुलेंस हैं। इसके बावजूद यहां मरीजों को बहलाकर निजी अस्पतालों तक ले जाकर करीब 50 निजी एंबुलेंस चालक अस्पताल के बाहर डेरा डाले रहते हैं।
यहां आने वाले मरीजों को इन एंबुलेंस के चालक और उनके साथी गेट से ही मरीजों के तीमारदारों को घेरकर उन्हें अस्पताल की व्यवस्थाओं का हवाला देकर निजी अस्पताल ले जाने की सलाह देते हैं। उन्हें तरह-तरह की सुविधाएं बताते हुए उनके मरीज को सुरक्षित कराने का आश्वासन देकर फंसा लेते हैं।
आगरा से लेकर दिल्ली तक के अस्पतालों में इन एंबुलेंस संचालकों का नेटवर्क होने की वजह से यह मेडिकल कॉलेज के मरीजों को वहीं ले जाते हैं और वहां से मोटी धनराशि कमीशन के रूप में लेते हैं। कुछ मरीजों और तीमारदारों की शिकायतों पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से पुलिस को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से एंबुलेंस संचालकों की मनमानी जारी है।
केस 1
15 अगस्त 2023 को आगरा के एत्मादुला क्षेत्र के रहने वाले अवनीश कुमार मां शकुंतला देवी को यहां पर लेकर आए थे। इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर के बाहर एंबुलेंस चालकों ने उन्हें निजी अस्पताल के लिए राय दी। इस पर वह मां को यहां से एक प्राइवेट एंबुलेंस से लेकर के आगरा के लिए चले गए, जब यहां पर देखा कि एंबुलेंस चालक को प्राइवेट हॉस्पिटल वाला 20 हजार रुपये दे रहा है। उन्होंने इसका विरोध किया था। एंबुलेंस चालक वाहन से रुपये लेकर भाग गया था। इस दौरान प्राइवेट हॉस्पिटल के स्टाफ से नोकझोंक हुई थी। उन्होंने इसकी शिकायत भी विश्वविद्यालय प्रशासन को की थी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने थाना पुलिस को लिखित में शिकायत की थी।
केस 2
25 फरवरी 2023 को जनपद मैनपुरी के करहल निवासी सनोज कुमार ने बेटे अभय यादव (25) को इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में सीना में दर्द होने पर भर्ती कराया था। यहां पर एंबुलेंस चालक बेहतर इलाज का झांसा देकर इटावा के एक निजी अस्पताल में ले गए थे। यहां उनसे कई गुना रुपये वसूले गए। विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की गई थी। इसके बाद भी एंबुलेंस चालकों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लगातार प्राइवेट एंबुलेंस चालकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन को लिखित में सूचना दी जाती है। इसके बावजूद अगर कार्रवाई नहीं होती है तो घोर लापरवाही है।
वर्जन
उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही परिवहन और पुलिस विभाग के साथ मिलकर अभियान चलाया जाएगा। मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। सुशांत श्रीवास्तव, एसडीएम
एंबुलेंसों प्रवेश पर रोक है-सीएमएस
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि निजी एंबुलेंसों को मेडिकल कॉलेज परिसर में घुसने पर रोक लगा दी गई है। एंबुलेंस चालक बाहर से मरीजों के तीमारदारों को घेर लेते हैं। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को फिर से अवगत कराया जा रहा है।
