इटावा। जिले में दस से अधिक रजबहों और माइनरों की रेलिंग विहीन पुलिया बढ़े हादसे को दावत दे रहीं हैं। पुलियों की रेलिंग महीनों से जर्जर हालत में हैं। कई माइनर तो पूरी तरह से रेलिंग विहीन हैं। लेकिन उनके निर्माण की ओर किसी का ध्यान नहीं है। मौसम में बदलाव होना शुरु हो गया है अगले माह से कोहरा भी दस्तक देने लगेगा। ऐसे में ये जर्जर पुलिया राहगीरों के लिए आफत बन सकती हैं। जनपद में मुख्य रूप से दो नहरों से 50 से अधिक रजबहा और माइनर निकाले गए हैं। इनसे किसान अपने फसलों की सिंचाई करते है। बीते वर्ष जिले की कुछ रजबहों की जर्जर पुलियों की मरम्मत कराकर उनकी रंगाई-पुताई का काम भी किया गया था। जिले के प्रमुख रजबहा और माइनरों की टूटी रेलिंग की हकीकत बयां करती रिपोर्ट।
भोगनीपुर निचली गंगा नहर के एक्सईएन शिवराज सिंह ने कहा कि पुलियों की रेलिंग को दो बार सही कराया जा चुका है। इसके लिए अलग से बजट जारी नहीं होता है। इसके लिए वह अपने स्तर से संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क करके समाधान निकलवाए जाने का प्रयास किया जाएगा।
दृश्य 1- रेलिंग विहीन है जगोरा गारमपुर पुलिया
जसवंतनगर। क्षेत्र के दो अलग-अलग स्थानों पर बीते एक वर्ष से पुलियों की रेलिंग टूटी पड़ी हैं। कचौरा रोड पर स्थित माइनर की पुलिया में सिर्फ कुछ ईंटें ही दिखाई पड़ती हैं। इसी प्रकार जगोरा से गारमपुर जाने वाला रजबहा की पुलिया रेलिंग विहीन है। इस जगह फुटपाथ ही नहीं है ऐसे में चालकों काे यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि पुलिया का अस्तित्व कहां से कहां तक है। ग्रामीण रमेश कुमार, आदेश, सत्यम कुमार, भैरो पाल, ज्ञान सिंह ने बताया कि इस पुलिया को टूटे डेढ़ वर्ष हो गया पर विभाग ने अभी तक ठीक नहीं कराया है। (संवाद)
दृश्य 2- पाली बंबा की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से परेशान होते किसान
भरथना। नगर क्षेत्र स्थित भरथना-बकेवर मुख्य मार्ग पर पाली बंबा की पुलिया क्षतिग्रस्त अवस्था में है। इसी मार्ग पर एक ओर पाली और साम्हों गांव जाने वाले संपर्क मार्ग हैं। वहीं, दूसरी ओर ओवरब्रिज जाने वाला लिंक मार्ग हैं। मुख्य चौराहा हाेने के कारण छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन बना रहता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिया बीते तीन वर्ष से क्षतिग्रस्त है। मरम्मत के अभाव में समय के साथ और जर्जर होती जा रही है। इन दिनों किसान अपनी धान की फसल को बेचने के लिए मंडी पहुंच रहे है ऐसे में उन्हें भी अपने वाहनों का फंसने का डर सताता रहता है। (संवाद)
दृश्य 3- इटावा-बरेली हाईवे पर टूटी रेलिंग दे रही हादसों को दावत
बसरेहर। इटावा-बरेली हाईवे स्थित कस्बा बसरेहर से निकले बनकटी माइनर की पुलिया लगभग छह माह से टूटी पड़ी है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन रहता है। पुलिया चौराहे पर स्थित होने के कारण इस मार्ग से सिरसा, मोहब्बतपुर , कैलामउ, बवनपुरा सहित आसपास के 20 से अधिक के गांवों का आवागमन रहता हैं। माइनर की पुलिया में रेलिंग का कहीं नामोनिशान नहीं है। इससे रात के समय हादसे का हमेशा डर बना रहता है। लोगों ने कई बार रेलिंग बनवाए जाने की मांग की पर नतीजा सिफर रहा। (संवाद)
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बोले लोग
बसरेहर निवासी योगेश राजपूत ने बताया कि पुलिया पर रेलिंग न होना राहगीरों के लिए खतरे से खाली नहीं हैं। कोहरे में जब दृश्यता काफी कम हो जाती है तब ऐसे मार्गों से गुजरना हादसे को दावत देना है। बसरेहर निवासी गौतम शाक्य कहते है कि तिराहों और चौराहों की पुलियाें की रेलिंग हमेशा सही रहनी चाहिए। इससे सामने से आने वाले वाहन चालक अंदाजा लगा सके और हादसे का शिकार होने से बच जाएं।
