फोटो 03: त्वचा रोग विशेषज्ञ के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद

फोटो 04: महिला मरीजों को दवा लिखतीं महिला चिकित्सक। संवाद

जिला अस्पताल में ढाई महीने से नहीं हैं त्वचा संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर

मरीजों की औसत संख्या घटकर आधी रह गई

संवाद न्यूज एजेंसी

इटावा। ढाई महीने से अधिक समय से जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने से त्वचा रोगियों को अन्य चिकित्सकों को दिखाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर मरीजों की संख्या करीब आधी रह गई है।

जिला अस्पताल के कमरा नंबर 51 और 56 में दो -दो चिकित्सक बैठते हैं और रोजाना करीब 70 से अधिक मरीज देख रहे हैं। जबकि त्वचा रोग विशेषज्ञ होने पर सामान्य दिनों में रोगियों की संख्या सवा सौ से लेकर 150 होती थी।

कक्ष नंबर 51 में डॉ.सोनाली विश्वास और डॉ.अनामिका राजपूत दोनों मिलकर रोजाना करीब 100 से 150 मरीजों को देखतीं हैं। डॉ.अनामिका ने बताया कि रोजाना करीब 25 से 30 त्वचा रोगी आ रहे हैं। ज्यादातर फंगस के मरीज होते हैं उन्हें देखकर दवाइयां लिख देते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर मरीज को सैफई दिखाने की सलाह देते हैं।

कमरा नंबर 56 में डॉ. प्रशांत यादव और डॉ. पूजा ने करीब 250 मरीजों को देखा। इनमें 50 से अधिक मरीज त्वचा रोगी के थे। बताया कि कुछ के चेहरे पर कील-मुंहासे थे ज्यादातर को फंगस इंफेक्शन था। बताया कि त्वचा रोग से बचाव के लिए सर्दी शुरू होने से पहले गर्म कपड़ों को धोकर धूप में सुखाकर ही पहनें। महिलाओं की हथेली में यदि इंफेक्शन है तो वह ग्लब्स पहनकर ही रसोई के काम करें।

जिला अस्पताल में कार्यरत त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति गुप्ता एक अक्तूबर से अवकाश पर चल रहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक जनवरी में उनके आने की संभावना जताई है। सीएमएस डॉ.एमएम आर्या के अनुसार शासन को डॉ. प्रीती गुप्ता के छुट्टी पर होने की जानकारी दी जा चुकी है।



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