ताखा। रामचरित मानस को अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करने के सिए बुद्धिहीनों की जरूरत नहीं है। भगवान राम ने क्रांति के लिए गरीब, पिछड़े, शोषित, वानर, भालुओं को चुन कर रामराज्य की स्थापना की थी। यह बातें जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य जी महाराज ने संत सम्मेलन में कही।
ग्राम नगला बंधा में आयोजित भागवत कथा में अयोध्या से आए जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य जी महाराज ने कहा कि रामचरित मानस पर उंगली उठाने वाले अज्ञानी हैं। सूर्य को चमकने के लिए जुगनू की आवश्यकता नहीं है। सनातन धर्म पर विरोधियों की टिप्पणियों का जवाब देना अति आवश्यक है। उसके लिए धर्म मंचों से महापुरुषों के वक्तव्य को सुनना आवश्यक है।
भगवान श्रीराम के अक्षर विग्रह श्री रामचरित मानस में सबसे निम्न जाति के समझे जाने वाले केवट से भगवान नाव मांग कर अपने वक्षस्थल से लगा लेते हैं। जबकि इंद्र से रथ मांगने में संकोच करते हैं। शबरी के जूठे बेर खा कर नारी जाति को सम्मान देते हैं। जटायु नाम के पक्षी को पिता के समान मान लेते हैं। युद्ध भूमि में वानर भालुओं से सहायता लेते हैं।
रामचरित मानस पर उंगली उठाने वाले इन बातों की चर्चा क्यों नहीं करते हैं।संत सम्मेलन में महामंडलेश्वर जनार्दन दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म से ही विश्व का कल्याण निहित है अन्यथा चारों ओर विश्व में अशांति व्याप्त है। शांति के लिए एकमात्र धर्म सनातन धर्म है जो विश्व का कल्याण चाहता है। पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास जी महाराज ने कहा कि भारत संतो, विप्रों और गोवंश की भूमि हैं। इनको बचाने के लिए सनातन धर्म को मानने वाले समस्त जातियां एकजुट हैं।
