सैफई। सैफई डिपो की खटारा बसों से सफर करना यात्रियों के लिए जोखिम भरा होता जा रहा है। रविवार को करीब 50 यात्रियों को लेकर इटावा से मैनपुरी लेकर जा रही बस का अपराह्न पौने तीन बजे घिरोर चौराहा के पास ब्रेक फेल हो गया। ब्रेक फेल होने पर वह आगे चल रही डग्गामार बस से टकराई, इससे बड़ा हादसा बच गया। जबकि परिवहन निगम की ओर से बसों में सुरक्षा को लेकर दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।

दिवाली का त्योहार नजदीक है, कुछ ही दिनों में यात्रियों की आवाजाही और बढ़ जाएगी। बावजूद इसके सैफई डिपो की बसों को दुरुस्त कराने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि खराब बसाें को ठीक कराने में कई-कई दिन खड़ा रहना पड़ रहा है। सैफई डिपो से 21 बसों का संचालन किया जा रहा है। डिपो में 19 ऐसी बसें हैं, जो खटारा हालत में हैं। ऐसी स्थिति में त्योहारी सीजन में यात्रियों को मुश्किलों भरा सफर करना पड़ सकता है।

बसों की पड़ताल करने पर ज्यादातर बसों में आग से बचने के संसाधन तक नहीं मिले। डिपो से ज्यादातर मार्गों पर बसें बिना सुरक्षा के इंतजाम के ही दौड़ रही हैं। किसी कारणवश बस में आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं। जिन बसों में यंत्र हैं, उनकी मियाद पूरी हो चुकी है। कुछ यंत्रों पर तारीख नहीं लिखी होने से पता नहीं चल सका कि अग्निशमन यंत्र की अंतिम तारीख क्या है। ऐसे में परिवहन निगम के बसों में सुरक्षा के किए जाने वाले दावों की पोल खुल जाती है।

नाम न बताने की शर्त पर चालकों व परिचालकों का कहना है कि बसों को चलाना अब खतरे से खाली नहीं है। बसों में गेयर बक्सा, क्लच प्लेट, सीट बेल्ट, हेडलाइट और ब्रेक खराब होने से इमरजेंसी ब्रेक लगाना भी मुश्किल हो जाता है। इस वजह से कई बसें हादसे की शिकार हो चुकी हैं। बसों को वर्कशॉप पर सही कराने के लिए लेकर आने पर वर्कशॉप का मौजूद स्टाफ आनाकानी करता है। वर्कशॉप में भी जरूरत का कोई सामान मौजूद नहीं है। इस वजह से बसें हादसे का शिकार होती रहती हैं।

चालकों ने बताया कि सैफई डिपो की एक बस 21 अक्तूबर की सुबह 11 बजे इटावा से 35 सवारी के साथ मैनपुरी के लिए रवाना हुई थी। मैनपुरी के करहल थाना क्षेत्र में ट्रक से भिड़त हो गई थी। बस का गेयर बक्सा और ब्रेक ठीक से काम नहीं रहा था। लेकिन चालक की सूझबूझ से बड़ा हादसा बचा था। बस में अग्निशमन यंत्र भी नहीं था।

इसी तरह 30 सितंबर को डिपो की एक बस दिल्ली से सवारियां भरकर इटावा आईटीआई के पास पहुंची थी। तभी ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़त हो गई थी। बताया गया कि ब्रेक खराब होने की वजह से इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगने की वजह से हादसा हुआ और चालक व परिचालक घायल हो गए थे। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं था।

बस चालकों का कहना है कि लगातार शिकायत करने के बाद भी बसों में ब्रेक एवं अन्य खराबी को सही नहीं किया जा रहा है। कभी-कभी रात के समय हेडलाइट न होने की वजह से भी सड़क हादसा होने का डर रहता है।

वर्जन

सैफई डिपो की ज्यादातर बसों में अग्निशमन यंत्र हैं। अगर किसी बस में एक्सपायर हो गया है या नहीं है तो उनमें अग्निशमन यंत्र रखवाए जाएंगे। जो भी बसों के अंदर कमी है उन्हें जल्द दूर किया जाएगा। -परशुराम पांडे, क्षेत्रीय प्रबंधक, इटावा।



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