सैफई (इटावा)। मेडिकल कॉलेज के पेसमेकर घोटाला प्रकरण में पुलिस की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने खरीद-फरोख्त वाली तीन कंपनियों और मेडिकल कॉलेज के 14 कर्मचारियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। इनमें से तीन अधिकारी और कर्मचारियों ने बयान भी दर्ज कराए हैं।

पेसमेकर घोटाले के आरोपी सर्जन डॉ. समीर सर्राफ को जेल भेजने के बाद पुलिस अब प्रकरण में शामिल अन्य जिम्मेदारों के बारे में भी जानकारी करने में जुटी है। एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देश पर सीओ नागेंद्र चौबे पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने करोड़ों रुपये की खरीद, फरोख्त में शामिल तीनों कंपनियों को नोटिस देकर उनसे खरीदे गए सामान और दाम समेत अन्य दस्तावेज मांगे हैं।

वहीं मेडिकल कॉलेज के 14 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। इसमें क्लर्क से लेकर उच्चाधिकारी तक शामिल हैं। नोटिस में पूछा गया है कि परिचेज डिपार्टमेंट में कार्यरत क्लर्क से लेकर उच्च अधिकारियों तक की लापरवाही सामने आने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बार-बार जांच कमेटियों की ओर से दोषी ठहरने के बावजूद भी आरोपी को बचाया गया। माना जा रहा है कि जल्द ही जवाब प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। इससे मेडिकल कॉलेज के स्टाफ में खलबली मची हुई है। सीओ ने बताया कि अभी जांच की जा रही है। जो तथ्य निकलकर सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ स्टाफ ने नोटिस प्राप्त करने के बाद अपना पक्ष रखा है, जिनकी गहनता से जांच चल रही है।

बहाल होने के बाद डॉक्टर ने 30 मरीजों को लगाया था पेसमेकर

तीन जनवरी 2022 को कार्य समिति की बैठक में समीर सर्राफा को बहाल कर दिया गया था। उसे कार्डियोलॉजी विभाग का विभाग अध्यक्ष भी बना दिया। उसने बाल होने के बाद लगभग 30 मरीजों को पेसमेकर लगाया था। संभावना लगाई जा रही है कि कार्य समिति की बैठक के दौरान जिन अधिकारियों की ओर से इसे बाहर किया गया था। उन सभी के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। उधर, कोर्ट के आदेश के बाद समीर सर्राफा की पत्नी ने सैफई थाना से कार को कब्जा में लिया था।



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