इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम दिलीप कुमार सचान ने 20 साल पुराने बच्चे के अपहरण के मामले में दोष सिद्ध होने पर दो दोषियों को तीन साल कैद की सजा सुनाई। दोनों दोषी औरैया जिले के रहने वाले हैं। इसके अलावा कोर्ट ने उन पर छह-छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता बलबीर सिंह राजपूत ने बताया कि जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के फर्रुखाबाद फाटक निवासी स्वामी शरण गुप्ता ने 26 फरवरी 2003 को चार साल के बेटे ऋषि के घर से अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। स्वामी शरण की गुप्ता आयरन स्टोर के नाम से दुकान है।
आरोप था उनका कर्मचारी इंद्रेश निवासी कंधेसी भरथना दुकान से घर गया और बहाने से पुत्र को अगवा कर ले गया। काफी तलाश के बाद भी पुत्र का कोई सुराग नहीं लग सका। मामले में पुलिस ने दस्यु निर्भय गुर्जर, इंद्रेश के अलावा थान सिंह निवासी हाजीपुरा, शिव नारायण गोहानी अजीतमल, कायम सिंह निवासी काशीपुरा फफूंद, महेंद्र, राम सनेही, हरपाल निवासी नगला नंदन के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की थी।
इस दौरान पुलिस की कई टीमें बच्चे की तलाश में लगी थीं। घटना के करीब 11 माह बाद पुलिस को कुछ बदमाशों की लोकेशन मिली थी। एक मार्च 2004 को बकेवर थाना पुलिस ने मुठभेड़ के बाद ऋषि को बदमाशों के चंगुल से मुक्त करा लिया था। हालांकि बदमाश मौके से भाग निकल गए थे।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता तरुण कुमार शुक्ला की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने इंद्रेश कठेरिया व थान सिंह को दोषी पाया। जबकि अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इंद्रेश व थान सिंह को सजा सुनाई गई और जुर्माना भी लगाया।
