अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सरकार की योजनाएं सहरिया आदिवासियों की तकदीर नहीं बदल पाईं। अब भी कई परिवार झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर हैं। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना के कई लाभार्थियों के आवासों की अभी भी छत नहीं पड़ सकी है। वह पॉलीथिन तानकर रहने को विवश हैं। यह स्थिति तब है जब श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। पेश है मड़ावरा तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों की रिपोर्ट…।
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अधूरे पड़े हैं आवास
मड़ावरा। ग्राम पंचायत दिदोनियां अंतर्गत ग्राम दारुतला में सहरिया समुदाय की करीब 350 की आबादी है। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री आवास योजना से आदिवासियों को आवास तो मिले, लेकिन रामकिशोर, लक्ष्मण, बलराम समेत कई लाभार्थियों के आवास अब भी अधूरे हैं। पत्थर की खदान में मजदूरी करने वाले टीबी की बीमारी से ग्रसित लखन गांव में पत्नी समेत अपने खेत में बनी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। गांव में सात हैंडपंप सक्रिय हैं, लेकिन प्लेटफार्म क्षतिग्रस्त होने से आसपास जलभराव से पानी दूषित हो रहा है। हर घर जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन से सप्ताह में एक-दो बार ही पानी आता है।
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कहीं पॉलीथिन तनी तो कहीं कमरे में दरवाजे नहीं
डोंगराखुर्द। ग्राम पंचायत पारौल में सहरिया आदिवासियों में रमला, गुलाब बाई, तुलसी, कालीचरण, गंगारानी ने बताया कि उन्हें आवास से लेकर अन्य सरकारी योजनाओंं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया कि जिन लोगों को आवास मिले, उनके यहां भी कहीं छत पर पॉलीथिन पड़ी है तो कहीं कमरे में दरवाजे नहीं हैं। पशुओं को घर में घुसने से रोकने के लिए झाड़ियों की चहारदीवारी (बारी) लगा देते हैं। बारिश के दिनों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
