evening of Awadh became sad with departure of Zakir Hussain sahab was fan of Lucknowi Kathak and food

एसएनए के कार्यक्रम में जाकिर हुसैन के साथ अर्चना राज और तरुण राज।
– फोटो : अमर उजाला

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बात 17 जुलाई, 2016 की है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ”दरबार-ए-ताज” कार्यक्रम के लिए मंच सजा। सितार वादक नीलाद्रि कुमार के साथ संगत के लिए तबले पर जाकिर हुसैन साहब मौजूद थे। दर्शक रोमांच से भरे थे। दोनों धुरंधरों की अंगुलियां अपने वाद्ययंत्रों पर नाचीं तो सभागार तालियों से गूंज उठा। जाकिर साहब लखनऊवालों को अपना दीवाना बना चुके थे। उनके साथ सेल्फी लेने वालों की होड़ सी लग गई। रविवार को जाकिर हुसैन के निधन की खबर सुनकर समूचा अवध उदास हो गया।

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उन्होंने लखनऊवालों को बताया कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि वाद्ययंत्र सरस्वती है। इसकी इज्जत करो। इसे खेल मत समझो। तबले के पास ऐसा कोई सामान न रखें, जिससे इसका अपमान हो। हर वाद्य में एक रूह है, एक आत्मा बसती है। अच्छा कलाकार बनने के लिए वाद्य की इज्जत करनी होगी। 



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